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Shimla News: सरकारी लैब में एलएफटी और ब्लड शुगर समेत 10 टेस्ट बंद

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आईजीएमसी में अब तक 13 टेस्ट हो चुके हैं बंद, मरीजों को झेलनी पड़ रही है परेशानी
टेस्ट किट खत्म होने से हो रही है दिक्कत
क्रस्ना लैब में बोझ बढ़ने से लग रहे हैं घंटों
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) की सरकारी लैब में दस और टेस्ट बंद हो गए हैं। इस कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

बंद पड़े टेस्टों में लीवर फंक्शन (एलएफटी), किडनी फंक्शन (आरएफटी), ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, एल्ब्युमिन, यूरिक एसिड, फॉस्फेट, लिपिड प्रोफाइल हिस्ट्री और एमाइलेज टेस्ट शामिल हैं। सरकारी लैब में पहले ही विटामिन डी, विटामिन बी-12 और एचबीए-1 सी जैसे टेस्ट बंद चल रहे हैं। अब दस अन्य टेस्ट और बंद होने से सरकारी लैब में 13 टेस्टों की मरीजों को बुधवार से सुविधा मिलना बंद हो गई है। इसका कारण टेस्ट किट न मिलना बताया जा रहा है। आईजीएमसी की सरकारी लैब में अब रक्त से जुड़ी कोई भी नियमित जैव रासायनिक (बायोकेमिकल) जांच नहीं हो रही है।
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प्रतिदिन औसतन 600 मरीज आईजीएमसी की लैब में टेस्ट करवाने के लिए आते हैं। इनमें बड़ी संख्या बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित और आयुष्मान तथा हिमकेयर कार्ड धारक मरीजों की होती है। अब मरीजों को क्रस्ना लैब में यह टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। क्रस्ना लैब में सरकारी दरों पर टेस्ट होते हैं लेकिन सरकारी लैब में टेस्ट न होने के कारण इस लैब पर बोझ बढ़ गया है। इस कारण पहले मरीजों को घंटों लाइनों में खड़े होकर पंजीकरण करवाना पड़ता है। इसके बाद फिर लाइन में लगकर खून के सैंपल देना पड़ते हैं। इस कारण मरीजों को एक टेस्ट करवाने में ही पूरा दिन लग जाता है। इसके अलावा काम बढ़ने से निजी लैब से रिपोर्ट भी देरी से मिलती है। क्रस्ना लैब में आजकल हर रोज 800 से अधिक टेस्ट हो रहे हैं।
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किस बीमारी के लिए कौन सा टेस्ट
एलएफटी से लिवर की सेहत का आकलन किया जाता है और यह हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, पीलिया जैसे रोगों की पहचान में मदद करता है। आरएफटी से गुर्दों की कार्य प्रणाली जांची जाती है। ब्लड शुगर जांच से डायबिटीज का पता चलता है। लिपिड प्रोफाइल से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का पता लगाया जाता है जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम आंका जाता है। एल्ब्युमिन जांच से शरीर में प्रोटीन स्तर का पता लगाया जाता है। यूरिक एसिड की जांच गठिया और पथरी के जोखिम को दर्शाती है। फॉस्फेट से हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत का पता लगाया जाता है। एमाइलेज से अग्न्याशय और पाचन तंत्र की स्थिति का अंदाजा लगता है। यह सभी जांचें शरीर के प्रमुख अंगों की कार्यक्षमता जांचने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन बुधवार सुबह ओपीडी में आए सैकड़ों मरीज जब जांच पर्ची लेकर लैब में पहुंचे तो उन्हें लौटा दिया गया। स्टाफ ने कहा कि टेस्ट किट खत्म हो गई है और टेस्ट नहीं होंगे।
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