कर्मचारियों के वेतन और भविष्य निधि में गलत निर्धारण से 2.93 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। अध्यक्ष पद रिक्त होने के बावजूद 2.56 लाख रुपये के बिल पंजीयक स्तर पर पास किए गए। इन्हें सक्षम अधिकारी की मंजूरी नहीं मिली थी। परिषद के पास लाखों रुपये बैंक खातों में निष्क्रिय पड़े थे। अतिरिक्त राशि को सावधि जमा में निवेश नहीं किया गया।
परिषद को ब्याज की भारी हानि हुई। लाखों रुपये के निवेश के बावजूद सावधि जमा रजिस्टर और मूल प्रमाण पत्र सुरक्षित नहीं रखे गए। इससे परिपक्वता पर मिले ब्याज की जांच असंभव हो गई। परिषद की चल-अचल संपत्ति और स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी नहीं हुआ। इससे सामग्री के दुरुपयोग और चोरी की आशंका बढ़ी।
अभी मेरे पास यह ऑडिट रिपोर्ट नहीं आई है। इसे देखने के बाद इसका परीक्षण किया जाएगा। -यादविंद्र गोमा, आयुष मंत्री, हिमाचल सरकार।
अभी इसकी जानकारी नहीं है। इसका पता किया जाएगा। -ए शाइनामोल, सचिव, आयुष, हिमाचल सरकार