यह इकाई अधीक्षण अभियंता (डिजाइन एवं गुणवत्ता नियंत्रण) के कार्यालय के तहत काम करेगी। यह मुख्य अभियंता के माध्यम से सीधे इंजीनियर-इन-चीफ को रिपोर्ट करेगी। परियोजनाओं की निगरानी के लिए एआई , डिजिटल डैशबोर्ड और ऑनलाइन दिशानिर्देश जैसे उपकरण उपयोग होंगे। यह नई व्यवस्था सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करेगी। सीपीडब्ल्यूडी वर्क्स मैनुअल लागू होने से टिकाऊ और मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार होगा। पानी के बड़े टैंक, पाइपलाइन और सिंचाई परियोजनाएं सख्त मानकों पर बनेंगी। घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग खत्म होगा। जनता को लंबे समय तक चलने वाली सुविधाएं मिलेंगी और पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी। डिजिटल निगरानी से पेयजल योजनाएं समय पर पूरी होंगी, जिससे लीकेज जैसी समस्याएं कम होंगी। इससे जनता के पैसे का सही उपयोग होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
सरकार ने कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दो स्तरीय निगरानी प्रणाली लागू की है। 20 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं में विभागीय स्तर पर गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी होगी। वहीं 20 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं का स्वतंत्र तृतीय पक्ष गुणवत्ता ऑडिट कराया जाएगा। तृतीय पक्ष ऑडिटर जियो टैग्ड तस्वीरों और परीक्षण रिपोर्टों के माध्यम से नियमित निगरानी करेंगे। वे डिजिटल डैशबोर्ड का उपयोग करके रिपोर्टिंग भी करेंगे। यह प्रणाली कुल गुणवत्ता प्रबंधन को प्रभावी बनाएगी।
जल शक्ति विभाग अब सीपीडब्ल्यूडी के गुणवत्ता आश्वासन मैनुअल को मानक दस्तावेज के रूप में अपनाएगा। इसमें बिल्डिंग वर्क्स-2022, ईएंडएम सेवाओं के लिए नीति और चेकलिस्ट शामिल हैं। कुल गुणवत्ता प्रबंधन पर सीपीडब्ल्यूडी हैंडबुक भी लागू होगी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि इन दस्तावेजों में भविष्य के संशोधन स्वतः ही हिमाचल में लागू होंगे। इससे प्रदेश को देश की नवीनतम निर्माण तकनीकों का लाभ तुरंत मिलेगा। यह व्यवस्था गुणवत्ता आधारित और जवाबदेह कार्य संस्कृति को प्रभावी ढंग से लागू करेगी।
जल शक्ति विभाग में सीपीडब्ल्यूडी वर्क्स मैनुअल और दो-स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को लागू करना प्रदेश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इस नई व्यवस्था और आरईएस-क्यू सेल के गठन से निर्माण कार्यों में लेटलतीफी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगेगी। हमारा लक्ष्य डिजिटल टूल्स और स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट के माध्यम से जनता के पैसे की पाई-पाई का सही उपयोग सुनिश्चित करके हर घर तक स्वच्छ और निर्बाध पेयजल पहुंचाना है।- मुकेश अग्निहोत्री, उप मुख्यमंत्री