इस रूट से होकर ट्रकों को करीब 150 किलोमीटर और पिकअप को 50 से 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। पंचकूला और परवाणू मंडी में सेब के सैंपल सुबह 8 बजे ऑक्शन यार्ड पर लग जाते हैं। गाड़ी देरी से पहुंचे तो सुबह के मुकाबले दाम कम मिलते हैं। इसलिए तीसरे दिन माल बिक पा रहा है। स्थानीय मंडियों में सेब खरीद कर बाहरी राज्यों को ले जाने वाली खरीदारों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पराला मंडी ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन के महासचिव संदीप पांडे ने बताया कि कोटखाई, चौपाल, जुब्बल, रोहड़ू का सेब ट्रकों में नेरीपुल, कुमारहट्टी, नाहन मार्ग से होकर पंचकूला और परवाणू मंडी पहुंचाया जा रहा है।
ढली मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रताप सिंह कैरों ने बताया कि बाहरी राज्यों के लिए 600 पेटी सेब लेकर रवाना होने वाले 15 टन वाले ट्राले कुमारहट्टी-नाहन होते हुए रवाना हो रहे हैं और 4 से 5 घंटे अधिक समय लग रहा है। ट्रांसपोर्टर किराया भी 6 से 7 हजार रुपये अतिरिक्त किराया ले रहे हैं। सेब उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर का कहना है कि नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कें प्रभावित होने से बागवानों की परेशानी बढ़ गई है। सड़कें दुरूस्त करने के लिए सरकार के दिनरात युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है।