शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज का रेडियोलॉजी विभाग मुश्किल में आ गया है। यहां पीजी (एमडी) की दो से आठ सीटें करने की बात कहकर डिप्लोमा कोर्स बंद कर दिए गए। पीजी सीटें बढ़ने से पहले डिप्लोमा कोर्स बंद होने से स्थिति डगमगा गई है। प्रबंधन रेडियोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स बंद करने के निर्णय पर फंस गया है। विभाग के तहत एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे इत्यादि आते हैं। प्रदेश के अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी है। मौजूदा समय में रेडियोलॉजी महकमे में एमडी की कुल पांच सीटें हैं। इनमें दो सीटें स्थायी और तीन अस्थायी हैं। डिप्लोमा कोर्स की तीन सीटें थीं। प्रबंधन ने डिप्लोमा कोर्स यह कहकर बंद करवा दिए कि इसकी एवज में एमडी की सीटें आठ कर दी जाएंगी।
इससे कॉलेज का ही फायदा होगा और डिग्रीधारक डाक्टर मिलेंगे। डिप्लोमा धारकों से निजात मिलेगी। विभाग ने तर्क दिया था कि पहले आठ सीटों की मंजूरी लो, उसके बाद बेशक डिप्लोमा कोर्स बंद कर दो। विभाग ने पहले ही संदेह जताया था कि अगर एमसीआई से स्वीकृति नहीं मिली तो दोनों ओर से जाएंगे। ऐसे में कैसे अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट मुहैया करवा पाएंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आने के बाद अब रेडियालॉजी में चल रही एमडी की तीन अस्थायी सीटों पर भी खतरा मंडरा गया है। एमसीआई ने मेमोग्राफी और केजुअल्टी पर सवाल उठाए हैं। मेमोग्राफी काफी समय से खराब चल रही है। बीते एक साल से एक भी मेमोग्राफी नहीं हुई है। इस पर एमसीआई ने कड़ा ऐतराज जताया। इस कारण रेडियालॉजी में नई सीटें तो क्या पुरानी सीटों की मान्यता पर भी खतरा मंडरा गया है। अभी डिप्लोमा धारकों से काम चलाया जा रहा था।
ब्लैक लिस्ट करने को लिखा था
रेडियालॉजी विभाग की ओर से प्रबंधन को लिखित में जानकारी दी गई थी कि मेमोग्राफी मशीन खराब है। जिस कंपनी को इसकी मेंटेनेंस का जिम्मा सौंपा गया है, वह नहीं आ रही है। लिहाजा, इसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए, लेकिन प्रबंधन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। समय रहते कुछ कदम उठाते तो संभव है विभाग में एमडी की आठ सीटें हो जाती अब तीन अस्थायी सीटों पर संशय है।
क्या कहता है प्रबंधन
आईजीएमसी प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि एमसीआई ने जो कमियां बताई हैं, उन्हें दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थिति ठीक होते ही एमसीआई को फिर से निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।