फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विदेश से लौटकर ‘मदर ऑफ लॉ’ बनीं थीं लीला सेठ, ऐसी है कहानी

Sun, 11 Jul 2021 08:58 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लीला सेठ के लिए हिमाचल हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनना कोई बहुत आसान नहीं था क्योंकि उन्होंने बहुत छोटी उम्र में अपने पिता को खो दिया था लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका आत्मविश्वास उन्हें इस मुकाम पर लेकर गया। 
विज्ञापन
हाई कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं - फोटो : पिक्साबे
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 देश में 1947 से लेकर आजतक कुल 7 महिलाएं ही ऐसी हैं जो कि चीफ जस्टिस बनी हैं। जस्टिस लीला सेठ को आज देशभर में इसलिए जाना जाता है क्योंकि वे हाई कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं। चीफ जस्टिस बनने से पहले वे दिल्ली हाई कोर्ट में जज थीं। वे हिमाचल प्रदेश की हाई कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनी साथ ही पूरे देशभर में मदर इन लॉ भी कहलाईं। आइए जानते हैं चीफ जस्टिस लीला से जुड़ी अन्य बातें। 

11 साल की उम्र में खोया पिता को 

लीला सेठ का जन्म साल 1930 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। उनके पिता की मृत्यु तब ही हो गए जब वे 11 साल की थीं लेकिन इसका प्रभाव लीला की पढ़ाई पर नहीं पड़ा। उन्होंने दार्जिलिंग के एक विद्यालय में अपनी पढ़ाई पूरी की और करियर की शुरुआत में स्टेनोग्राफर के रूप में काम किया।  

लंदन बार परीक्षा में किया टॉप

लीला की शादी प्रेम सेठ से हुई जो कि शादी के बाद उन्हें अपने साथ लंदन लेकर चले गए। एक बच्चे को जन्म देने के बाद 27 साल की उम्र में लीला ने लंदन बार परीक्षा में टॉप किया। भारत लौटकर उन्होंने अपनी प्रेक्टिस को जारी रखा। 

समलैंगिक अधिकारों के लिए किया काम

जस्टिस लीला भारत में महिलाओं के अधिकारों को लेकर खूब काम किया है। वह जस्टिस वर्मा कमेटी का भी हिस्सा रह चुकी हैं जो कि निर्भया गैंगरेप के बाद गठित की गई थी। उन्होंने सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि समलैंगिकों के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई। 83 वर्ष की उम्र में लीला सेठ ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें