मनीषा ने बचपन के दिनों में अपने माता-पिता को कई आर्थिक समस्याओं का सामना करते देखा। इसी चीज ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। मनीषा हमेशा से दूसरों की मदद करना चाहती थी। इसी दिशा में काम करने के लिए उन्होंने नर्सिंग में बीएससी की डिग्री को प्राप्त किया।
इस कोर्स को खत्म करने के बाद उन्होंने नंदा कॉलेज में नर्सिंग के लेक्चरर के तौर पर काम करना प्रारंभ किया। इस नौकरी से उनकी जो भी कमाई होती थी। उससे वह किसी दीनहीन या जरूरतमंद व्यक्ति को दिन में एक बार खाना जरूर खिलाती थी। हालांकि इससे उनका मकसद पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कुछ और बड़ा सोच रखा था।
मनीषा चाहती थी कि वह इन लोगों को तीनों टाइम का खाना खिलाएं। हालांकि ये काम काफी मुश्किल था। इस वजह से उन्होंने एक एनजीओ का हाथ थामा। साल 2018 में उन्होंने खुद के एक एनजीओ की शुरुआत की, जिसका नाम जीविथम फाउंडेशन है। आज मनीषा इस एनजीओ के माध्यम से कई जरूरतमंद लोगों को खाना खिला रही हैं। इसके अलावा मनीषा ने उन लोगों के लिए फिजिकल एक्सरसाइज और वोकेशनल ट्रेनिंग जैसे प्रोग्राम का भी बंदोबस्त कर रखा है।