साल 2018 में जब जिलोमोल ने अपनी कस्टम मेड मारुति सिलेरियो कार खरीदी तो उसी साल उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस भी मिल गया। वो इन लोगों के लिए एक मिसाल हैं जो खुद को दिव्यांग होने पर सारी उम्मीदे खो देते हैं। परिवार में किसी के गाड़ी न चलाना न आने पर वो बड़े ही आत्मविश्वास के साथ स्टीयरिंग को थामती है और ब्रेक लगाती हैं। पिछले दिनों जब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने उनकी तारीफ की।
पढ़ाई में हमेशा आगे रहने वाली जिलोमोल ने ग्राफिक डिजाइन में अपना करियर चुना है। इसके साथ ही उन्हें पेंटिग करना भी खासा पसंद है। वो कहती हैं कि उन्होंने कभी इस बात की परवाह नही की कि वो शारीरिक रूप से विकलांग है। जन्म से ही बिना हाथों के पैदा हुईं थॉमस पैरों और घुटनों की मदद से कार चलाती हैं। लेकिन उन्हें अपनी कार खरीदने के लिए घर के लोगों को मनाना पड़ा। ये काम मुश्किल था क्योंकि मां और पिता को उनकी बहुत चिंता थी। यहीं नहीं जिलोमोल शारीरिक रूप से विकलांग कलाकारों के लिए स्थापित स्टेट माउथ एंड फुट एसोसिएशन की फाउंडिंग मेंबर हैं।