डॉ. सीमा द्विवेदी
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जो खुद अपने से हार स्वीकार नहीं करता, उसे हालात हरा नहीं सकते। यह कथन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा द्विवेदी पर सटीक बैठता है। विश्व महिला दिवस के मद्देनजर उनसे बात हुई तो महिला सशक्तीकरण की एक झलक मिली। वे महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य और गर्भ संस्कार पर काम कर रही हैं। उनकी मेहनत से बड़ी संख्या में किशोरियां, गर्भवती और दूसरी महिलाएं लाभान्वित हुई हैं।
जानते हैं उनके संघर्ष की कहानी, उन्हीं की जुबानी...
हम अपने गाजीपुर जिले के गांव गहमर में थे। पिताजी कर्नल रणजीत उपाध्याय बांग्लादेश के युद्ध पर गए थे। तबीयत खराब हुई तो मां झोलाछाप के पास ले गई। कमर में इंजेक्शन लगाया और दाहिना पैर पैरालाइज हो गया। बहुत दिनों तक आयुर्वेद की जड़ी-बूटी का तेल लगाया तो पैर ठीक हुआ। घर में भाई के साथ डिनर टेबल पर टेनिस खेलते थे।
बाद में राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट खेले। एक और घटना याद आती है। पिताजी के साथ हम लोग अरुणांचल प्रदेश में थे। उस वक्त मैं केंद्रीय विद्यालय में इंटर में थी। कक्षा में तीन छात्र थे। दो आर्ट्स के और मैं अकेली साइंस की। शिक्षकों को भी दिलचस्पी न रहती। खुद से इरादा किया कि टॉप करना है, अकेले जुटी और ईस्ट जोन में टॉप किया। इसी तरह ऑल इंडिया पीएमटी में हालात बने।
खुद से बीएससी का कोर्स खत्म किया और ऑल इंडिया थर्ड रैंक आई। सबसे बुरे हालात उस वक्त हुए जब डॉक्टरों ने हाइपर मोबाइल ज्वाइंट्स बताया। मना किया कि सीढ़ी न चढ़ें, जोर से हाथ-पैर न हिलाएं नहीं तो हड्डियों के जोड़ खुल जाएंगे। लेकिन मैं काम करती रही। उसी वक्त वर्ष 2017-18 में डॉक्टरों ने एडवांस स्टेज के कैंसर का शक जाहिर किया।
मानसिक बिखराव की स्थिति आ गई। अवसाद गहरा गया। समझ न आता कि क्या करें? फिर खुद को संभाला योग प्राणायाम के साथ शिव आराधना की, मानसिक बल मिला। हालांकि कैंसर नहीं था फाइब्रोएड था। हालात सुधरे तो फिर दूसरों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया।
मैसेज
जीवन टीम वर्क है। परिवार, समाज और ईश्वरी सत्ता के साथ तालमेल बैठाएं। हौसला बुलंद रखें और क्रियाशील बने रहें। खुद से नहीं हारेंगे तो कोई परिस्थिति नहीं हरा पाएगी। भारतीय संस्कृति, परंपराएं प्रेरणा का अकूत भंडार हैं। उनसे सीखें।- डॉ. सीमा द्विवेदी
महिलाओं की इस तरह करतीं हैं मदद
वह गर्भ संस्कार के संबंध में कार्यशाला का आयोजन कर महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। महिलाओं को दिनचर्या के साथ-साथ ध्यान, यौगिक क्रियाएं आदि बताई जाती हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करके किशोरियों के स्वास्थ्य, एनीमिया से बचाव, खानपान आदि के संबंध में बताया जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में गर्भ संस्कार पर प्रोजेक्ट भी चल रहा है। डॉ. सीमा इसकी को-कन्वीनर हैं।