फैशन डिजाइनिंग की ली ट्रेनिंग
प्रोग्राम के लिए उन्हें गांव से लगभग 35-40 किलोमीटर दूर जाना होता था। कार्यक्रम में शामिल होने वाली लड़कियों को लेने के लिए एक गाड़ी आया करती थी लेकिन दीपाली को उस गाड़ी में चढ़ने-उतरने में दिक्कत होती थी। रोजाना ट्रैवल करना उनके लिए कठिन था लेकिन उन्होंने इन सभी दिक्कतों का सामना किया।
ट्रेनिंग के दौरान उन्हें नए दोस्त मिले, जो उनकी क्लास जाने, ट्रैवल करने और कई कामों में मदद किया करते थे। यहां उन्होंने फैशन को लेकर पढ़ाई की। बच्चों के कपड़ों से लेकर महिलाओं और पुरुषों के कपड़ों की डिजाइनिंग और सिलाई की ट्रेनिंग ली। आज वह केवल ब्लाउज की सिलाई तक सीमित नहीं, बल्कि कपड़ों की डिजाइनर कपड़े तैयार करती हैं। एक फैशन डिजाइनर के तौर पर अपनी पहचान बना रही हैं।