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Inspiring Story: शारीरिक दिक्कत नहीं आई सफलता के आड़े, दीपाली शिव शंकर की कहानी हर किसी के लिए है प्रेरणा

Sat, 14 May 2022 05:33 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
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जीवन में समस्याएं होना आम बात है। लेकिन उन समस्याओं के सामने घुटने न टेकने वाले और दिक्कतों का सामना करते हुए सफलता प्राप्त करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। दुनिया में कई ऐसे लोग हैं, जिनके जीवन में कई तरह की दिक्कतें हैं। इनमें शारीरिक कमी एक बड़ी परेशानी है, जो जीवन भर उनके साथ रहती है लेकिन कई ऐसे रियल लाइफ हीरो हैं, जो इन कमियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने देते और अपने सपनों को पूरा करते हैं। उनकी सफलता हर किसी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यहां आज हम एक ऐसी ही महिला की कहानी बता रहे हैं, जिसका जीवन हर किसी को प्रोत्साहन देता है। महिला का नाम है दीपाली शिवशंकर। दीपाली शिव शंकर ने जीवन की मुश्किलों से लड़ते हुए सफलता की ओर राह बनाई है। दीपाली शिवशंकर ने कभी नहीं माना कि उनकी शारीरिक कमजोरियां उनके सपने को पूरा करने के रास्ते में आ सकती हैं। उन्होंने अपनी पहचान बनाकर ये साबित भी कर दिया कि वह एक रियल लाइफ हीरो हैं, जिन्होंने हर एक महिला को अपने सपने को पूरा करनी उम्मीद दी है। चलिए जानते हैं दीपाली शिव शंकर के बारे में।

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कौन है दीपाली शिव शंकर?

दीपाली शिवशंकर एक फैशन डिजाइनर हैं। उन्होंने कपड़ों की सिलाई सीखने से लेकर खुद से डिजाइन बनाकर कपड़े तैयार करने तक का सफर तय किया है। उनकी राह में मुश्किलें कम नहीं थीं लेकिन दीपाली ने हर मुश्किल का डटकर सामना किया और फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

शिक्षा और जीवन संघर्ष

दीपाली शिवशंकर पुणे की हिंज गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की। वह आगे की पढ़ाई करना चाहती थीं लेकिन उनकी शारीरिक अक्षमताओं के कारण वह गांव से बाहर स्कूल या कॉलेज खुद से नहीं जा सकती थीं। दीपाली ने घर पर रहकर ही माता पिता के काम में हाथ बंटाने और आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर होने का फैसला लिया।
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जीवन ज्योति कार्यक्रम से मिला आगे बढ़ने का मौका 

शुरुआत में उन्होंने सिलाई सीखी। घर पर रहकर ब्लाउज सिलना शुरू किया। माता पिता ने भी बेटी का साथ दिया और उन्हें एक सिलाई मशीन खरीद दी। दीपाली के जीवन को नई राह तब मिली जब उन्होंने जीवन ज्योति महिला सशक्तिकरण कोर्स में दाखिला लिया। इस प्रोग्राम के जरिए उन्हें मुफ्त परिवहन सुविधा, शिक्षा के लिए धनराशि मिली, जिससे वह गांव से बाहर जाकर ट्रेनिंग ले सकती थीं।

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फैशन डिजाइनिंग की ली ट्रेनिंग 

प्रोग्राम के लिए उन्हें गांव से लगभग 35-40 किलोमीटर दूर जाना होता था। कार्यक्रम में शामिल होने वाली लड़कियों को लेने के लिए एक गाड़ी आया करती थी लेकिन दीपाली को उस गाड़ी में चढ़ने-उतरने में दिक्कत होती थी। रोजाना ट्रैवल करना उनके लिए कठिन था लेकिन उन्होंने इन सभी दिक्कतों का सामना किया।

ट्रेनिंग के दौरान उन्हें नए दोस्त मिले, जो उनकी क्लास जाने, ट्रैवल करने और कई कामों में मदद किया करते थे। यहां उन्होंने फैशन को लेकर पढ़ाई की। बच्चों के कपड़ों से लेकर महिलाओं और पुरुषों के कपड़ों की डिजाइनिंग और सिलाई की ट्रेनिंग ली। आज वह केवल ब्लाउज की सिलाई तक सीमित नहीं, बल्कि कपड़ों की डिजाइनर कपड़े तैयार करती हैं। एक फैशन डिजाइनर के तौर पर अपनी पहचान बना रही हैं।
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