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Savita Pradhan: नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान की सफलता की कहानी है प्रेरणादायक

Mon, 01 May 2023 12:43 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वर्ष 2006 में सविता प्रधान ने प्रतियोगी परीक्षा पास की। वर्तमान में मध्य प्रदेश में नगर निगम आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। 
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Savita pradhan - फोटो : instagram
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विस्तार
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Savita Pradhan Biography in Hindi: प्रतियोगी परीक्षा पास करके लोक सेवा करने का सपना कइयों का होता है। लेकिन कुछ ही परिश्रम के साथ ही संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों का सामना करके सपने को पूरा कर पाते हैं। इन्हीं में कई महिलाओं के अफसर बनने की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। किसी ने नौकरी छोड़ी तो किसी ने बिगड़े हुए आर्थिक हालातों का सामना किया। ऐसी ही एक महिला अधिकारी हैं, जिन्होंने घरेलू हिंसा झेली, पारिवारिक तकलीफ सही और तंग आकर आत्महत्या का प्रयास भी किया। हालांकि इन सब के बाद आज वह नगर निगम आयुक्त के पद पर हैं और दूसरों की समस्या का समाधान कर रही हैं। विपरीत परिस्थितियों के सामने घुटने न टेंकने वाली यह महिला अफसर अपने चार माह के बच्चे को लेकर कार्य पर पहुंचीं तो हर किसी के लिए मिसाल बन गईं। यह संघर्षपूर्ण कहानी है सविता प्रधान की।

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सविता प्रधान का जीवन परिचय

सविता प्रधान मध्य प्रदेश के मंडी जिले की रहने वाली हैं। एक आदिवासी परिवार में जन्मी सविता के घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। वह पढ़ना चाहती थीं, जिसके लिए वह गांव से 7 किलोमीटर दूर स्थित स्कूल जाया करती थीं। सविता प्रधान में 2006 में एमपीएसी परीक्षा पहले ही प्रयास में क्लियर कर ली और अफसर बनी। 

सविता प्रधान की शिक्षा

सविता बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार थीं। वह 10वीं पास करने वाली अपने गांव की पहली लड़की थीं। पढ़ाई के लिए उन्हें स्कूल से स्कॉलरशिप मिली थी। इस कारण उनके लिए शिक्षा जारी रख पाना आसान बन गया। 10वीं के बाद वह गांव से 7 किलोमीटर दूर रोज पैदल पढ़ने के लिए जाया करती थीं, क्योंकि स्कूल तक जाने के लिए उनके पास प्रतिदिन भाड़े के 2 रुपये नहीं हुआ करते थे।
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कम उम्र में शादी और घरेलू हिंसा

पढ़ाई के दौरान ही उनके लिए रिश्ता आया और माता पिता ने कम उम्र में ही सविता की शादी कर दी। हालांकि शादी के बाद ससुराल वाले सविता को परेशान करते हैं। पति भी उनके साथ मारपीट करता। उनपर कई बंदिशे थीं। उन्हें अपने ही परिवार के साथ खाना खाने की अनुमति नहीं थी। खाना खत्म होने पर दोबारा बनाने, जोर से हंसने की इजाजत नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वह बाथरूम में छुपकर रोटी खाया करती थीं।
 

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सविता ने दो बच्चों को जन्म दिया लेकिन ससुराल वालों की प्रताड़ना कम नहीं हुई। तंग आकर सविता ने आत्महत्या का मन बना लिया और फांसी का फंदा तैयार किया। रिपोर्ट के मुताबिक, जब सविता आत्महत्या करने जा रही थीं, तो उनकी सांस उन्हें खिड़की से देख रही थीं, लेकिन उन्होंने सविता को रोका तक नहीं। इससे सविता की सोच बदली। उन्होंने सोचा कि उनके आत्महत्या करने से कुछ नहीं बदलेगा, बल्कि उनके बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा।

अफसर बनने की राह

सविता ने अपने बच्चों को इस पारिवारिक क्लेश से दूर रखने और उनका भविष्य सुधारने का निर्णय लिया और ससुराल छोड़ दिया। बच्चों को लेकर ससुराल की दहलीज पार की तो उनका पालन पोषण करने के लिए एक पार्लर में काम करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की। इंदौर विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर की डिग्री हासिल की। फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की।

पहले ही प्रयास में परीक्षा की पास

वर्ष 2006 में सविता प्रधान ने प्रतियोगी की परीक्षा पास की। उन्हें मध्य प्रदेश में नियुक्ति मिली। इस दौरान उनका चार महीने का बच्चा था, जिसे लेकर सविता दफ्तर जाया करती थीं। वर्तमान में वह मध्य प्रदेश नगर निगम आयुक्त के पद पर कार्यरत है।
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