मां का दूध शिशुओं के जीवन में काफी महत्वपूर्ण होता है। इसी के जरिए उनके शरीर के प्रारंभिक ग्रंथियों के विकास होने में मदद मिलती है। हमारे भारत में ऐसे कई नवजात शिशु हैं, जिन्हें पैदा होने के बाद मां का शुद्ध दूध नहीं मिल पाता। इस कारण उन्हें भविष्य मेंं कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे शिशुओं के लिए मुंबई का सिविक रन सियॉन हॉस्पिटल एक वरदान से कम नहीं है। ये भारत के पहले ह्यूमन मिल्क बैंक के रूप में भी जाना जाता है। 27 नवंबर 1989 में डॉ. अर्मिदा फर्नांडीस के नेतृत्व में इसकी स्थापना हुई।
उस समय से लेकर अब तक डॉ. जयश्री मोंडकर इसकी बागडोर संभाले हुए हैं। जयश्री मोंडकर इस हॉस्पिटल में नियोनेटोलॉजी विभाग की हेड हैं। इसके अलावा वे यहां के ह्यूमन मिल्क बैंक की इंचार्ज भी हैं। उन्हें भारत की गॉडमदर के नाम से भी जाना जाता है। ये बैंक उन शिशुओं को दूध मुहैया करवाता है, जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाता है।
डॉ. जयश्री मोंडकर का इस क्षेत्र में योगदान सराहनीय है। उनके इस प्रयास से भारत के न जाने कितने शिशुओं को मां का दूध मिल रहा है। डॉ मोंडकर बताती हैं - "मां का दूध एक शिशु के जीवन में काफी महत्वपूर्ण होता है। उसी के जरिए उसके सर्वांगीण विकास होने में मदद मिलती है।"
आगे वे कहती हैं - "अगर किसी शिशु को मां का दूध नहीं मिल रहा है, तो वह बेझिझक यहां के ह्यूमन मिल्क बैंक से दूध को ले सकता है।" आपकी जानकारी के लिए बता दें कि करीब 32 साल पहले जब इस बैंक की शुरुआत हुई थी। उस दौरान साल के भीतर महज 200 से 300 लीटर दूध इकट्ठा हो पाता था।
अब हर साल यहां पर 800 से 1200 लीटर मां दूध जमा होता है। एक दिन में करीब 3 से 4 लीटर मां का दूध यहां पर इकट्ठा हो जाता है। हमारे यहां एक गलत धारणा है कि मां का दूध डोनेट करने से उसकी सप्लाई कम हो जाती है। आपको बता दें एक मां जितना दूध डोनेट करती है। उसकी सप्लाई भी उतना ज्यादा बढ़ती है।