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Inspiration: डॉक्टर मदांकि एस ने संगीत को बनाया शक्ति पाने का जरिया, आज हैं हजारों फ़ॉलोअर्स

Sun, 24 Jul 2022 05:28 PM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डाॅ मदांकी - फोटो : dr madanki डा
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परीक्षा और उतार चढ़ाव सबके जीवन का हिस्सा होते हैं। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि एक सफल करियर, एक संतुलित, प्रेम से परिपूर्ण जीवन और सधा हुआ प्रोफेशन, यह सबकुछ जिसके पास है उसे और क्या चाहिए? उसे तो कभी कोई तकलीफ हो ही नहीं सकती लेकिन ज़िन्दगी इतनी सरल नही होती। जब सब चीजें आपके साथ अच्छी हो रही होती हैं तब अचानक सामने आ जाता है एक ऐसा पड़ाव जो जीवन को झटके से रोक देता है। ऐसे समय मे जो व्यक्ति बिना हार माने, चुनौतियों को स्वीकार करके उनका सामना करता है, वही विजेता कहलाता है। 

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विजेता बनने का यह सफर लेकिन आसान नही होता। इसके लिए अंदर से हिम्मत और साहस जुटाना होता है और अपने भीतर से ही उजाला कर राह ढूंढनी पड़ती है। ऐसा ही किया कोलकाता की आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर मदांकि एस ने।  उन्होंने अपने जीवन में आई चुनौतियों से लड़ने के लिए संगीत का साथ लिया। 
 
हाल ही में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा आयोजन में प्रस्तुति देकर लौटी डॉक्टर मदांकि ने बीते वर्षों में खुद को न केवल मजबूती से खड़ा किया है बल्कि अपनी बाधाओं को उन्होंने संगीत के सुरों के जरिये पार करने का हौसला भी जुटाया है। एक दक्षिण भारतीय परिवार में जन्मी डॉक्टर मदांकि को संगीत का माहौल अपने आस-पास से ही मिलता रहा। इसलिए संगीत उनकी आत्मा की गहराई में पैठा रहा। यूँ निरंतर कोई प्रशिक्षण तो नहीं लिया लेकिन बीच बीच में थोड़ा बहुत सीखना चलता रहा। स्कूल-कॉलेज में मंच पर प्रस्तुतिकरण देते देते आत्मविश्वास में और इजाफा हुआ। लोगों ने मीठी आवाज की तारीफ़ की लेकिन पढ़ाई और उसके बाद करियर, जीवन की तमाम व्यस्तताओं के बीच संगीत से नाता सिर्फ सुनने और कभी कभार गुनगुनाने तक सीमित रहा। ज्यादातर परिवार और मित्रों के बीच गाने और सुनने का अवसर मिलता। इसी तरह कई वर्ष बीत गए। इस बीच जीवन में कई पड़ाव आये, निजी तौर पर कई बाधाएं और चुनौतियाँ भी रहीं और जीवन इनके साथ चलता रहा। 

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डॉक्टर मदांकि और डॉक्टर अनिल का सुरीला सफर - फोटो : dr madanki
खुद डॉक्टर मदांकि के शब्दों में- जिंदगी ने एक बार फिर करवट ली और खूबसूरत से एक बदलाव की हवा ने जीवन में प्रवेश किया डॉक्टर अनिल नाहर वैद्य के रूप में। यह साल 2017 की बात है।  संगीत के एक कार्यक्रम में मेरी मुलाकात डॉक्टर अनिल से हुई। मेल-जोल बढ़ा और खुशनुमा, बेहद सकारात्मक शख्सियत के मालिक अनिल ने बहुत सहजता से मेरे जीवन में कब जगह बना ली पता ही नहीं चला। संगीत के लिए हमारे प्रेम ने हमें एक-दूसरे से जोड़ दिया और 2019 के अंत में हम विवाह के अटूट बंधन में बंध गए। विवाह के बाद हम मुंबई से कोलकाता शिफ्ट हुए और यहाँ प्रैक्टिस करने लगे। मेरे लिए ये जीवन को फिर से शुरुआत से जीने जैसा था। अनिल को माँ सरस्वती का वरदान था। वे बहुत अच्छा गाते थे। तो हम दोनों मिलकर गाते, हँसते और जीवन के हर पल को जीते। लेकिन जीवन कभी इतना सरल नहीं होता। मार्च 2020 में कोरोना ने दस्तक दी और इससे भी बड़ा आघात मुझे मिला अप्रैल 2020 में जब अनिल के लंग कैंसर से पीड़ित होने का पता चला। बीमारी इतनी दबे पाँव आई कि हमें भनक तक नहीं लगी और सीधे स्टेज 4 कैंसर पर पता चला। शायद लोगों का इलाज करते-करते हमने ही कहीं खुद को इग्नोर किया था। मैं स्तब्ध थी। समझ ही नहीं पा रही थी क्या करूँ? लेकिन अनिल तब भी जीवन और सकारात्मकता से लबरेज थे। पूरे 9 महीने उन्होंने असहनीय पीड़ा के बीच बीमारी से संघर्ष किया। हमने हर पल एक-दूसरे के साथ बिताया। कभी थोड़ा ठीक लगने पर हम साथ गाते, कभी गले लगकर रो लेते, कभी नियति के इस प्रहार पर हंस लेते। लगभग पूरा लॉकडाउन इसी तरह गुजरा और एक दिन अनिल अपनी मुस्कुराहट और हौसले की रौशनी मुझे देकर इस दुनिया को अलविदा कह गए।  
 
लोग कहते हैं कि समय हर पीड़ा का इलाज होता है। आज इस बात को 18 महीने बीत गए हैं लेकिन एक पल को भी मैं उस दर्द को मिटा नहीं पाई। ऐसे में संगीत मेरा सहारा बना है। मैंने फिर से गाना शुरू किया। अब फेसबुक पर मेरे करीब 4000 फ़ॉलोअर्स हैं और कई आयोजनों में मुझे प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। मैंने फिर से संगीत सीखना शुरू किया है। मैं यह विश्वास करती हूँ कि संगीत में वह ताकत है जो आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाती है। अनिल के हौसले और मुस्कुराहट के साथ मैंने फिर से जीवन को जीना शुरू किया है। जब भी गाती हूँ, ऐसा लगता है वो मेरे साथ, मेरे पास खड़े, मेरा उत्साह बढ़ा रहे हैं। 
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