दानसरी अनुसूया को लोग सितक्का के नाम से जानते हैं। 16 साल की उम्र में बंदूक उठाकर गरीबों और आदिवासियों की मदद के लिए निकली लड़की आज विधायक के रूप में लोगों की मदद कर रही है। लेकिन बंदूक को छोड़ समाज की मुख्यधारा से जुड़ करीब 16 साल पहले उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। उसके बाद इन्होंने एलएलबी की पढाई की और फिर लोगों की सेवा के इरादे से राजनीति में आ गईं। तेलंगाना ने मुलुगु क्षेत्र से निर्वाचित सितक्का लोगों तक मदद घूम-घूमकर पहुंचाती हैं। जहां पर भी लोगों को जरूरत होती है ये खुद ही सामान उठाकर चल देती हैं। रास्ते में फिर कभी मोटरसाइकिल तो कभी बैलगाड़ी या फिर साइकिल से अपनी मंजिल तक पहुंचती हैं।
एक समय माओवादी कमांडर बन बुलेट चलाने वाली सितक्का आज बैलेट की ताकत की मदद से लोगों की मदद करती हैं। रोजाना सुबह उठकर वो करीब दो महीने से जरूरत का राशन जैसे फल, सब्जियां, दाल, चावल पहुंचाती हैं। इस सामान में कुछ लोग दान देते हैं तो कुछ वो स्वयं इकठ्ठा करती हैं। 700 गांवों के इस निर्वाचन क्षेत्र में वो करीब 500 गांवों तक मदद पहुंचा चुकी हैं। उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि वो जहां भी जाती है लोग ढोल बजाकर उनका स्वागत करते हैं। ये मदद केवल अपने निर्वाचित क्षेत्रों तक ही नहीं बल्कि पड़ोसी गांवों तक भी पहुंचाती हैं।