सांकेतिक तस्वीर
'भाई, बाप, और मंगेतर की इज्जत'
राबिया हेरात सूबे में रहती हैं। उन्हीं के सूबे की एक औरत ने बीबीसी से बात की। वो न तो अपना नाम जाहिर करना चाहती थीं और न ही रेडियो के लिए आवाज ही देना चाहती थीं। लेकिन मर्दों के इस बर्ताव पर उन्होंने कोई एतराज नहीं था। वे इसे वाजिब भी ठहरा रही थीं। वो कहती हैं, "जब कोई मुझे अपना नाम बताने के लिए कहता है तो मुझे अपने भाई, अपने बाप और अपने मंगेतर की इज्जत के बारे में सोचना पड़ता है। और मैं अपना नाम बताने से इनकार कर देती हूं। मैं अपने परिवार को क्यों दुखी करूं। अपना नाम बताने की जरूरत ही क्या है?""मैं चाहती हूं कि लोग मुझे फलाने की बेटी, फलाने की बहन कह कर बुलाएं। और भविष्य में मैं अपने शौहर की बेगम और उसके बाद अपने बेटे की मां कह कर पुकारा जाना पसंद करूंगी।" ये कहानियां चौंका देने वाली हैं लेकिन इसमें कुछ भी अनूठा नहीं है। अफगानिस्तान में महिला के नाम के इस्तेमाल पर लोग तैयार नहीं होते हैं और कुछ इलाक़ों में तो लोग इसे तौहीन तक समझते हैं। बहुत से अफगान मर्द सार्वजनिक तौर पर अपनी मां, बहन या बीवी का नाम लेने में हिचकिचाते हैं क्योंकि ऐसा करना शर्मनाक माना जाता है। अफगान समाज में महिलाओं का जिक्र अमूमन घर के सबसे बड़े मर्द की मां, बेटी या बहन के नाम से किया जाता है। अफगानिस्तान के कानून के अनुसार जन्म प्रमाणपत्र में केवल पिता का नाम दर्ज किया जाना चाहिए।