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Ayodhya : परंपरा की बेड़ियों के चलते खाली रहेगी बड़ी छावनी के महंत की कुर्सी, मठ के सातवें संत ने बताई रीति

Sun, 07 Jan 2024 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा आलोक कुमार त्रिपाठी, अयोध्या

सार

बड़ी छावनी के महंत की कुर्सी लोकार्पण समारोह में भी खाली ही रहेगी। दरअसल महंत संत जगदीश दास 400 वर्षों की परंपरा से बंधे हुए हैं, जिसके कारण लोकार्पण समारोह में भी वह शामिल नहीं होंगे।
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रामजन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्राणप्रतिष्ठा समारोह में देशभर के संत-महंतों को आमंत्रण भेजा जा रहा है। वे आयोजन के साक्षी बनने के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके, बड़ी छावनी के महंत की कुर्सी लोकार्पण समारोह में भी खाली ही रहेगी। दरअसल महंत संत जगदीश दास 400 वर्षों की परंपरा से बंधे हुए हैं, जिसके कारण लोकार्पण समारोह में भी वह शामिल नहीं होंगे।

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बड़ी छावनी के मठ में संत परंपरा का सख्ती से पालन किया जा रहा है। बड़ी छावनी के सातवें महंत जगदीश दास का कहना है कि हमारे रामजी आ रहे हैं, लेकिन हम तो यहीं से बैठे-बैठे इसके साक्षी बनेंगे। समारोह में भी आमंत्रण मिला था, लेकिन परंपरा में बंधे होने के कारण नहीं जा सके थे।

उनका कहना है कि महंत पद पर बैठने वाले की आत्मशुद्धि के लिए यह नियम लगाए गए हैं। मठ की गद्दी पर बैठने वाला महंत आश्रम से बाहर कदम नहीं रखेगा। आहार शुद्ध हो, बुद्धि शुद्ध होगी, तो स्मृति शुद्ध होगी। हम मठ से बाहर जाएंगे तो खानपान की शुद्धता समाप्त हो जाएगी और मति में दोष आएगा। 
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महंत जगदीश दास ने कहा कि विदेशी संस्कृति के प्रभाव में आकर हमारी प्राचीन संस्कृति में कई विकृतियां आई हैं। तुलसीदास ने षटविकारों से दूर रहने का संदेश दिया है और इसी का पालन किया जा रहा है। 

राजा महाराज हुआ करते थे शिष्य :
महंत जगदीश दास ने बताया कि बड़ी छावनी के शिष्यों में राजा-महाराज शिष्य हुआ करते थे। राजवंश खत्म होने के बाद उनके वंशज भक्त नहीं बन सके। इसके कारण शिष्यों के दान-दक्षिणा से ही मठ का संचालन होता है।

आज तक नहीं बना महंत का आधार कार्ड
मठ से बाहर नहीं निकलने के कारण महंत जगदीश दास का आधार कार्ड भी नहीं बन सका है। गुरु पद पर न तो कोई रक्त संबंध का हो सकता, न तो गांव का। गुरु शिष्य परंपरा के अनुसार ही महंत पद पर चयन किया जाता है। सबसे पहले गुरु बलदेव दास महाराज मौनी और उसके बाद स्वामी रघुनाथ दास महाराज महंत बने।

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