ससुराल जनकपुर से दामाद श्रीराम के लिए भारी संख्या में उपहार शनिवार को अयोध्या पहुंचे तो भारत-नेपाल के बीच त्रेतायुगीन रिश्तों की डोर और भी मजबूत होती दिखी। मिथिला का कण-कण खिला, जमाई राजा राम मिला...मिथिला नगरिया निहाल सखियां, चारों दूल्हा में बड़का कमाल सखियां...की धुन से रामनगरी गूंज उठी। 40 कारों और सात बसों-ट्रकों से 581 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने के बाद अपने रामलला के लिए भार लेकर पहुंचे ससुरालियों के चेहरों की रौनक देखते ही बन रही थी। अमर उजाला विशेष टीम की रिपोर्ट...
रामलला दरबार में हाजिरी
जनकपुर के मेयर मोहन शाह और जानकी मंदिर जनकपुर के महंत रामतपेश्वर दास के साथ जनकपुरवासियों के समूह ने शनिवार को रामलला दरबार में हाजिरी लगाई। पहला भार उन्हें ही अर्पित किया गया। सभी उपहारों को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया गया।
एक संधि से नेपाल में गया था जनकपुर
नेपाल का जनकपुर बिहार के दरभंगा से 40 किमी दूर है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार माता सीता का जन्म जनकपुर में ही हुआ था। वर्ष 1816 में नेपाली शासकों और ईस्ट इंडिया कंपनी में हुई सुगौली संधि के बाद मिथिला राज्य का उत्तरी भाग नेपाल में चला गया। इसी में जनकपुर है। जनकपुर वही स्थान है, जहां देवी सीता राजा जनक को खेत में हल चलाते वक्त मिली थीं।
इस रास्ते से आए
जनकपुरधाम से जलेश्वर, सर्लारी के मलंगवा होते हुए सिमरौनगढ़, प्रसिद्ध गढ़ीमाई मंदिर के दर्शन के बाद बीरगंज में विश्राम, 5 जनवरी को बीरगंज से वाल्मीकिनगर, बेतिया, बगहा, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर होते हुए गोरखपुर के रास्ते देर रात अयोध्या पहुंची।
जनकपुर से आया भार
विवाह के बाद जिस रास्ते से सीताजी को लेकर आए श्रीराम, उसी मार्ग से आए ससुराल से उपहार
नेपाल में भी दीपोत्सव
प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन 22 जनवरी को न सिर्फ अयोध्या बल्कि पड़ोसी देश नेपाल में भी वृहद स्तर पर अनुष्ठान व उत्सव की तैयारी हो रही है। जानकी मंदिर जनकपुर के उत्तराधिकारी महंत राम तपेश्वर दास ने बताया कि नेपाल में 20 जनवरी से उत्सव की शुरुआत हो जाएगी। घर-घर पूजा-पाठ व अनुष्ठान होगा। रामजानकी मंदिर में इस दिन शाम को सवा लाख दीप जलाकर खुशी मनाई जाएगी, पूरे जनकपुर में दीपोत्सव मनेगा।