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Ram Mandir: पिहोवा में प्राण प्रतिष्ठा पर विशेष उत्साह, यहां प्रभु श्रीराम ने किया था पिता दशरथ का श्राद्ध

Mon, 08 Jan 2024 09:01 AM IST
नवीन दलाल सुनील धीमान, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

प्रभु श्रीराम का नाता धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पिहोवा से माना जाता है। क्योंकि भगवान श्री राम का कार्तिक मास की अमावस के बाद पहले शनिवार को प्राची तीर्थ पर आगमन हुआ था और पिता दशरथ का पिंडदान किया था।
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सरस्वती तीर्थ पिहोवा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में जहां भव्य मंदिर बनकर तैयार है, वहीं धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में भी इसे लेकर उत्साह है। खासतौर से पिहोवा में, जहां प्रभु श्रीराम का पूर्व से ही नाता रहा है। पुराणों के अनुसार, यहां न केवल भगवान श्रीराम का आगमन हुआ, बल्कि उनके पुरखों के नाम पर वर्तमान हरियाणा में एक नगर भी है, जिसका पौराणिक नाम पृथुदक है। यह महाराज पृथु के नाम पर रखा गया था, जिसे कालांतर में पिहोवा कर दिया। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने पिता दशरथ की मृत्यु के बाद यहां उनका श्राद्ध संस्कार भी किया था।

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सरस्वती तीर्थ पुरोहित एवं इतिहासकार विनोद पचौली ने बताया कि पद्म पुराण के अनुसार, भगवान श्री राम का कार्तिक मास की अमावस के बाद पहले शनिवार को प्राची तीर्थ पर आगमन हुआ था। प्राची तीर्थ में सरस्वती नदी पूर्व वाहिनी होकर बहती है, इसलिए भगवान राम ने प्राची तीर्थ में स्नान कर पिता दशरथ का पिंडदान किया था। इस कर्म के बाद भगवान राम ने खिचड़ी के साथ उनका श्राद्ध कर्म पूर्ण किया। साथ ही दक्षिणा के रूप में ब्राह्मणों को स्वर्ण दान किया था। आज भी कार्तिक मास की अमावस के बाद पहले शनिवार को पिहोवा में ब्राह्मणों को खिचड़ी भोजन कराने की परंपरा है।

वामन पुराण के अनुसार महाराज पृथु का जन्म राजा वेन के शरीर से हुआ था। कहा जाता है कि राजा वेन स्वभाव से दुष्ट थे। ऋषियों के संताप ने उसे भस्म कर दिया था। ऐसे में राजा पृथु को ही धरती का प्रथम राजा घोषित कर राजतिलक किया गया था। मान्यता है कि राजा पृथु ने पिहोवा के सरस्वती तीर्थ के पापांतक घाट पर अपने पिता को उदक यानी जल अर्पित किया था। इस कारण उनके नाम से यह तीर्थ पृथुदक नाम से विख्यात हुआ। उनके द्वारा प्रतिष्ठित पृथ्वेश्वर महादेव नगर के अधिष्ठाता यानी आधारभूत स्वामी माने जाते हैं। मान्यता के अनुसार, महाराज पृथु की 29 वीं पीढ़ी में ही श्री रामलला का अवतरण हुआ था।

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पितरों के पिंडदान को देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

वामन पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति सरस्वती के उत्तरी तट पर पिहोवा में जप करता हुआ अपना शरीर त्याग देता है, उसे निश्चित रूप से अमरत्व की प्राप्ति होती है। पिहोवा के पवित्रतम सरस्वती तीर्थ सरोवर के तट पर पितरों के पिंडदान के लिए आज भी देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। चैत्र चौदस को यहां भारी मेला लगता है।

प्राण प्रतिष्ठा पर सजेंगे मठ व मंदिर, होगा रामचरित मानस का पाठ
अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह है। यही कारण है कि यहां भी उत्सव की तैयारी शुरू हो गई है। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व यहां के विभिन्न मठ मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा। साथ ही रामचरित मानस और सुंदरकांड का पाठ भी किया जाएगा।
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