कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रथयात्रा लेकर चल रहे बद्रीप्रसाद विश्वकर्मा उर्फ ब्रदी बाबा शहर के बजरंग चौक स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह मध्यप्रदेश के जनपद दमोह के बटियागढ़ से 11 जनवरी को सिर की चोटी में रस्सी से रथ बांधकर पैदल निकले थे। 22 जनवरी को वह 501 किमी की दूरी तय कर अयोध्या पहुंचेंगे। हर जगह उन्हें भरपूर प्यार और स्नेह मिल रहा है। जिससे उनके अंदर एक नई ऊर्जा का संचार होता है। 500 साल से भगवान तिरपाल में रह रहे हैं। अब भगवान की प्राण प्रतिष्ठा होने पर बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इन पुनीत कार्य में अहम योगदान बताया। रथ में राम, जानकी, लक्ष्मण व हनुमान की प्रतिमा लेकर चल रहे हैं। इस मौके पर हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक अंकित राजपूत, विजय तिवारी, नीरज गुप्ता, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष मनोज शिवहरे, समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी, मनोज देवलिया आदि मौजूद रहे।
राम मंदिर में अड़चन आने पर ली थी प्रतिज्ञा
सिर की चोटी से रामरथ खींचते अयोध्या जा रहे बद्री बाबा ने बताया कि करोड़ों रामभक्तों की तरह वह भी अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होते लेकिन राम मंदिर निर्माण में साल-दर-साल आ रही अड़चन के चलते वह हताश और दुखी हो गए थे। वर्ष 1992 में उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि जब भी भगवान राम का भव्य और दिव्य राम मंदिर बनेगा, तब वह अपनी चोटी में राम रथ बांधकर पैदल ही अयोध्या जाएंगे। की गई प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए वह अयोध्या जा रहे हैं।
प्रतिदिन दाल-रोटी खाकर चलते 50 से 55 किमी
चोटी में रथ बांधकर अयोध्या जा रहे बद्री बाबा मध्यप्रदेश के बटियागढ़ गांव में स्थित हनुमान मंदिर में रहकर पूजा-अर्चना करते हैं। वह बचपन से ही गुरु के सानिध्य में मंदिर की कुटिया में रहते हैं। सिर की चोटी से राम रथ बांधकर वह प्रतिदिन 50 से 55 किमी का सफर तय कर रहे हैं। दिन में एक बार वह सादा भोजन में दाल-रोटी खाकर चल रहे हैं। उनका कहना है कि 500 साल बाद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। इससे अच्छा पल और कुछ नहीं हो सकता।