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एक राम मंदिर ऐसा: क्रांतिकारियों ने इंग्लैंड की कोर्ट में लड़ा था केस, कहा जाता है बीच वाला मंदिर, पढ़ें कहानी

Sun, 21 Jan 2024 11:03 AM IST
हिमांशु अवस्थी मनीष पाल, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मेस्टन रोड स्थित श्रीराम मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के लिए अंग्रेज गिराना चाहते थे। इसके लिए क्रांतिकारियों ने इंग्लैंड की कोर्ट में केस लड़ा था।
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मेस्टन रोड स्थित श्रीराम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में मेस्टन रोड स्थित श्रीराम मंदिर का इतिहास बड़ा ही अभूतपूर्व है। इस मंदिर को ढहाने से बचाने के लिए क्रांतिकारियों और स्थानीय लोगों ने इंग्लैंड की कोर्ट तक केस लड़ा था। दरअसल, अंग्रेज इस मंदिर के पास से गुजर रही सड़क को चौड़ा करने के लिए मंदिर को ढहाना चाहते थे।

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इसके चलते मंदिर का केस केस इंग्लैंड की कोर्ट में पहुंचा था। श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी ट्रस्ट के ट्रस्टी रोहित साहू बताते हैं कि साहू समाज के हेमराज साहू ने कई मनोकामनाएं पूरी होने पर इस मंदिर का निर्माण करवाया था। उस समय मंदिर में लगने वाला पत्थर जयपुर से मंगवाया गया था।

इसके बाद इस मंदिर का सुंदरीकरण बाबूराम साहू ने 1852 में करवाया था। पहले इस मंदिर के बगल से सड़क जाती थी, लेकिन सन 1913 में सड़क विस्तारीकरण का प्लान अंग्रेजी सरकार ने तैयार किया और मंदिर को ढहाने के लिए आए। ऐसे में क्रांतिकारियों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रीय लोगों ने अंग्रेजी सरकार का पुरजोर विरोध किया।

बोला जाता है बीच वाला मंदिर
ऐसे में इसका केस इंग्लैंड की अदालत में गया। यहां पर क्रांतिकारियों के हक में फैसला गया और मंदिर को नहीं तोड़ा गया। इसके बाद इसके अगल-बगल से दो सड़कों का निर्माण किया गया, तब से इसको बीच वाला मंदिर भी बोला जाता है। वर्तमान में इस मंदिर के प्रति भक्तों की अटूट आस्था है।
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14 अगस्त की रात को फहराया जाता है झंडा
उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक श्रीराम, लक्ष्मण व जानकी मंदिर में आजादी के समय क्रांतिकारियों की बैठक होती थी। मंदिर के अंदर ही एक गुप्त गुफा भी बनी है। जब अंग्रेजों की ओर से क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए यहां पर छापा डाला जाता था, तब क्रांतिकारी इस गुप्त गुफा से निकलकर दूसरे स्थान पर पहुंच जाते थे। देश जब आजाद हुआ तब 14 अगस्त की रात 12 बजे तिरंगा फहराया गया था। झंडा फहराने की यह परंपरा वर्तमान में भी चल रही है।
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