पहले सुनिए रामधुन और रामभक्ति में रम जाइए...
प्राण-प्रतिष्ठा और भगवान राम से जुड़े इस अवसर को और अविस्मरणीय बनाने के लिए 'अमर उजाला आवाज' भी खास प्रस्तुति लेकर आया है। पॉडकास्ट की इस श्रृंखला में एक ही जगह पर मिलेंगे भगवान श्रीराम की आराधना के लिए तैयार खास भजन। इस खास संकलन में इंसान के जीवन को सकारात्मक संदेश देने वाली मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से जुड़ी आध्यात्मिक बातें भी शामिल हैं।
आइए सुनें-
रामलला की मूर्ति की विशेषताएं
प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के चौथे दिन शुक्रवार को सुबह नौ बजे अरणी मंथन से अग्नि प्रकट की गई। अग्नि प्रकट के साथ चौथे दिन का अनुष्ठान शुरू हो गया। इसी बीच रामलला की मूर्ति की बेहद खास तस्वीर सामने आई। इसमें उनके पूरे स्वरूप को देखा जा सकता है। तस्वीर में रामलला माथे पर तिलक लगाए बेहद सौम्य मुद्रा में दिख रहे हैं। हालांकि, रामलला की यह तस्वीर गर्भ गृह में लाने से पहले की है। अभी भगवान की आंखों में पट्टी बंधी हुई है।
आइये जानते हैं रामलला की मूर्ति की सभी विशेषताएं...
बिस्तर का त्याग कर चौकी पर कंबल बिछाकर सोएंगे पीएम
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मुख्य जजमान की भूमिका निभा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्राण प्रतिष्ठा के तीन दिन पहले कठिन व्रत और संयम से गुजरना होगा। यम नियम के तहत पीएम बिस्तर की जगह लकड़ी की चौकी पर कंबल बिछा कर शयन करेंगे।
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राम मंदिर की कानूनी लड़ाई
- फोटो : Amar Ujala
134 साल चली कानूनी लड़ाई की पूरी कहानी
आज जो भव्य राम मंदिर आकर ले रहा है उसके पीछे दशकों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सफर काफी चुनौतियों भरा रहा है। बाबरी विवाद, आदालतों में चली लंबी लड़ाई और फिर शीर्ष अदालत के फैसले के बाद मंदिर का निर्माण शुरू होना।
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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : Amar Ujala
बंदउँ बालरूप सोइ रामू ...सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू
जासु बिरहँ सोचहु दिन राती।
रटहु निरंतर गुन गन पाँती॥
रघुकुल तिलक सुजन सुखदाता।
आयउ कुसल देव मुनि त्राता॥
शताब्दियों की प्रतीक्षा, पीढ़ियों के संघर्ष और पूर्वजों के व्रत को सफल करते हुए सनातन संस्कृति के प्राण रघुनन्दन राघव रामलला, अपनी जन्मभूमि अवधपुरी में नव्य-भव्य-दिव्य मंदिर में अपने भक्तों के भावों से भरे संकल्प स्वरूप सिंहासन पर प्रतिष्ठित होने जा रहे हैं। 500 वर्षों के सुदीर्घ अंतराल के बाद आए इस ऐतिहासिक और अत्यंत पावन अवसर पर आज पूरा भारत भाव विभोर और भाव विह्वल है। पूरी दुनिया की दृष्टि आज मोक्षदायिनी अयोध्याधाम पर है। हर मार्ग श्रीरामजन्मभूमि की ओर आ रहा है। हर आंख आनन्द और संतोष के आंसू से भीगी है। हर जिह्वा पर राम-राम है। समूचा राष्ट्र राममय है।
पढ़ें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खास लेख
जगदगुरु रामभद्राचार्य बोले- काशी और मथुरा के लिए भी लूंगा संकल्प
रामनगरी में जगदगुरु रामभद्राचार्य सबसे बड़ी रामकथा कर रहे हैं। खूबसूरत सा पंडाल है। उन्होंने संकल्प किया था, मंदिर बनने तक अयोध्या रामकथा करने नहीं आएंगे। संकल्प पूरा हुआ है। आजकल हर दिन 10 हजार लोग उन्हें सुनने आते हैं। वह देश के लोकप्रिय संत हैं। उनसे मिलने आ रही हस्तियों को हैंडल करने ‘टीम रामभद्राचार्य’ में एक सेलिब्रिटी मैनेजर भी है। इनमें नेता, अभिनेता, संत और ब्यूरोक्रेट्स जैसे भिन्न-भिन्न प्रकार के लोग शामिल हैं। वे अंग्रेजी मीडिया वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देते हैं। उनके कमरे के बाहर सिर्फ भक्तों ही नहीं, कैमरे और क्रू से लैस मीडिया वालों की भी उतनी ही लंबी कतार है। किसी फिल्म के सेट सा माहौल है। एक इंटरव्यू खत्म, पैकअप...तो दूसरा तैयार खड़ा है। रोल कैमरा मीडियावाले बोलते हैं, लेकिन कट रामभद्राचार्य जी की टीम को कहना पड़ता है। वक्त की बेहद कमी है।
इसी वक्त से समय निकालकर अमर उजाला ने उनसे कुछ सवाल पूछे...
अयोध्या नगर निगम के कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी...गंदा हो गया तो?, 'अयोध्या के योद्धा' बोले- हम हैं न
मैं हनुमान गढ़ी से लता चौक की ओर कड़कड़ाती ठंड में जा रहा था। अचानक से देखा तो एक व्यक्ति अपने कपड़े उतार रहा है। उसको देखकर तो एक बार को पूरे बदन में सरसरी सी दौड़ गई। जहां आदमी के पैर का एक छोटा सा हिस्सा रजाई से बाहर हो जाए तो ठंड में बर्दाश्त नहीं कर पा रहा ऐसे में ऐसा कोई क्यों कर रहा है। थोड़ा ध्यान से देखा तो उसके आगे एक ट्रक खड़ा था, उस पर लिखा था 'अयोध्या नगर निगम'। थोड़ी देर के लिए वहीं पर खड़ा हो गया और देखने लगा। जिस व्यक्ति ने अपने कपड़े उतारे थे, उसको एक विशेष प्रकार के उपकरणों के साथ तैयार किया जाने लगता है। मामला समझ में आ गया था की ये सीवर में उतरकर सफाई करने वाले हैं। मन किया तो सीवर में झांककर देखा। एक पल को तो ये सोचकर डर लगा कि ये व्यक्ति इतनी गहराई में उतरने वाला है। इस बीच उसको तैयार करने का काम लगातार चल रहा था। कोई उसे रस्सी के सपोर्ट सिस्टम से बांध रहा था, तो कोई उसे ऑक्सीजन मास्क लगाने की तैयारी कर रहा था। इस दौरान मैंने जल निगम और नगर निगम की ओर से चलाए जा रहे इस सफाई अभियान के बारे में इस टीम का नेतृत्व कर रहे तिलक राम बोहरी से बात की।
अयोध्या के बच्चों के अपने-अपने राम
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया से अलग सोचते हैं अयोध्या के बच्चे
अयोध्या की गलियों में राम को खोजें तो कई बार आसानी से मिल जाते हैं और कई बार काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस बार में राम के स्वरूप में विराजमाने होने वाले अयोध्या के छोटे- छोटे राम की खोज में निकला था। मन में विचार अयोध्या के बच्चे इस समय कहां होंगे और उनके मन में क्या विचार होंगे। मैं निकल पड़ा एक बार फिर अयोध्या की गलियों में एक स्कूल की खोज में जहां बहुत सारे बच्चे मुझे मिल जाएं। हनुमानगढ़ी से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर एक स्कूल मिला, जिसका नाम था महाराजा पब्लिक स्कूल। स्कूल के प्राचार्य अजीत कुमार द्विवेदी से मिलने का अनुरोध किया।
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अयोध्या को अब लिखना मुश्किल, बस महसूस कीजिए
इस समय अयोध्या को लिखना मुश्किल हो रहा है, चारों तरफ एक बेचैनी सी है। इसके साथ ही एक अजीब किस्म की खुशी। सब कुछ थोड़ा तेज सा चलने लगा है। श्रद्धालुओं के मन में एक ही सवाल है पता नहीं उसको दर्शन होंगे या नहीं। पुलिस वालों को लग रहा है की कहीं कोई चूक न हो जाए। दुकानदार ग्राहकों को सही से संभाल नहीं पा रहे हैं। सफाईकर्मियों के हाथ तेजी से झाड़ू लगाने और कचरे को हटाने में लगे हैं। इन सब के बीच में पुलिस का सायरन और अधिकारियों की गाड़ियों की दौड़। पूरी दुनिया का मीडिया यहां है और सबलोग सबकुछ कवर करने को उतारू। बीच-बीच नांचती हुईं बाबाओं की टोलियां और दूर-दूर से आए हुए लोग। जिन्होंने कैमरा नहीं देखा वो उन्हें ऐसे देख रहे हैं जैसे ये किसी दूसरे देश का प्राणी है। कुछ लोग इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह उन्हें कैमरे में आने का मौका मिल जाए।
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