मंदिर के लिए फूल तैयार करते सैनी....
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मेरी आंखें उन पलों की साक्षी हैं जब ताला टूटा, रामलला बाहर आए, उनको सर्दी, गर्मी और बरसात में टेंट में विराजे देखा। अब भव्य मंदिर बन रहा है। सपना सच होने जैसा है। मन आह्लादित है। यह कहना है श्रीतुलसी चौरा यानी रामचरित मानस जन्मभूमि के सामने छोटी सी दुकान में फूलमाला तैयार करने वाले बालकृष्ण सैनी का। उनका परिवार 23 वर्षों से रामलला के दरबार को सजाने के लिए अनवरत फूलमालाएं पहुंचा रहा है। बालकृष्ण की आखें भर आती हैं, जब कहते हैं...भरोसा था, मेरे आराध्य भव्य मंदिर में विराजेंगे।
जीवन में सबसे बड़ा उत्सव यही
रामपथ तैयार होने में बालकृष्ण की दुकान चली गई। वे कहते हैं...एक क्या, 100 दुकानें भी चली जातीं, तो गम नहीं होता। भगवान को घर मिल रहा है। जरूरत पड़े तो घर का भी त्याग कर सकता हूं। कहते हैं, हमारा तो आधार ही राम हैं। जीवन में सबसे बड़ा उत्सव यही है। प्राण प्रतिष्ठा हो जाए तो अपना मकान भी बनवाएंगे। उन्होंने 22 जनवरी की सजावट के लिए ट्रस्ट को प्रस्तुतीकरण दिया है।
प्राण प्रतिष्टा की तैयारी जोरों पर
इन दिनों राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी जोरों पर है। मगर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले श्रीराम का भव्य 75वां प्राकट्य महोत्सव आनंद, उल्लास और वैभव के साथ मनाने की तैयारी है। 1949 में राममंदिर में वर्तमान स्वरूप में श्रीराम के प्रकट होने के साथ यह आयोजन शुरू हुआ था। इस बार रामलला अपने नए मंदिर में आ रहे हैं। ऐसे में तीन दिनी आयोजन भी खास होने जा रहा है।
श्रीरामजन्मभूमि सेवा समिति के कोषाध्यक्ष आचार्य सत्येंद्र दास वेदांती बताते हैं, 1949 में बाबा अभिराम दास के स्वप्न में भगवान आए और राममंदिर (तब विवादित स्थल) में अपने प्रकट होने का ज्ञान दिया था। बाबा रात में ही पांच संतों के साथ स्वप्न में दिखाए गए स्थल पर पहुंचे, तो भगवान वहां दिव्य व अलौकिक मूर्ति (वर्तमान में टेंट में विराजमान) के रूप में मौजूद थे। बाबा ने विधि-विधान से आरती-पूजन किया। तबसे आज तक पौष शुक्ल पक्ष की तृतीया को इस महोत्सव का आयोजन हो रहा है। इस महोत्सव का नेतृत्व मंदिर आंदोलन के अगुवा महंत रामचंद्र परमहंस दास से लेकर श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास तक करते रहे हैं। नृत्य गोपाल अब संरक्षक हैं।
तीन दिनी महोत्सव
- 12 जनवरी को कलश पूजन।
- 13 को श्रीसूक्त, पुरसूक्त व लक्ष्मी सूत्र तथा रामचरितमानस सुंदरकांड का पारायण होगा।
- 14 को पूर्णाहुति के साथ विशाल शोभायात्रा निकलेगी और रामकोट की परिक्रमा की जाएगी।