अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से जुड़े निमंत्रण को अस्वीकार किए जाने पर विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यहां सवाल रामलला के प्रति आस्था का है। अहम सवाल मन में राजनीति और वोट बैंक का है, जबकि इसके लिए बिना किसी कारण के संघ और भाजपा को निशाना बनाया जा रहा है।
कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि न तो आयोजन का राजनीतिकरण किया गया और न ही निमंत्रण देने के मामले में भेदभाव ही बरता गया। अगर प्रधानमंत्री को न्योता गया है तो विपक्ष के नेताओं को भी गया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को निमंत्रण गया तो मल्लिकार्जुन खरगे को भी निमंत्रण दिया गया है। मुस्लिम वोट बैंक के चलते कुछ लोगों को लगा कि न्योता मिलने में देरी हुई। कुछ लोगों को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आने में संकोच है। इसका कारण वोट बैंक और राजनीति हो सकती है।
जिनकी रामलला में श्रद्धा है वे आएंगे
कुमार ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण कार्य करोड़ो लोगों की आस्था से जुड़ा है। इस मामले में राजनीति करने वालों को समझना चाहिए कि उन्हें भगवान राम ने बुलाया था। जिनकी रामलला में श्रद्धा है वह आएंगे, जिनकी नहीं है उसके लिए हम क्या कर सकते हैं? हम सबका स्वागत करने के लिए तैयार हैं।
शंकराचार्यों के संदर्भ में भ्रम फैलाने का आरोप...
आलोक कुमार ने कहा, कुछ दिनों से शंकराचार्यों के नाम पर भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है। शृंगेरी शारदा पीठ व द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्यों ने प्राण प्रतिष्ठा का स्वागत किया है। लगातार भ्रम फैलाने के कारण दोनों ने बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
यह गांधी की नहीं, नेहरू की कांग्रेस...
इससे पहले, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर सनातन विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि यह नेहरू की कांग्रेस है, महात्मा गांधी की नहीं। कांग्रेस सनातन विरोधी है। जब भारत का इतिहास करवट ले रहा होता है तब-तब वो बहिष्कार करते हैं। उन्होंने कहा, जीएसटी लागू हुआ तब उसका बहिष्कार किया, जी-20 भारत में हुआ तो राष्ट्रपति के भोज का बहिष्कार किया। जब सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था, तब नेहरू शामिल नहीं हुए। उन्होंने जो पत्र लिखा वो जगजाहिर है। इंदिरा के जमाने पर गो सेवकों पर गोलियां चलीं। सोनिया के समय राम काल्पनिक बता दिए गए।
कांग्रेस ने पाप धोने का एक सुनहरा मौका गंवा दिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि कांग्रेस को पाप धोने का एक मौका दिया गया था, लेकिन पार्टी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकरा कर एक सुनहरा मौका गंवा दिया। वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, कांग्रेस ने तुष्टीकरण के लिए प्राण प्रतिष्ठा के निमंत्रण को ठुकराया।
सिद्धरमैया ने कांग्रेस के निर्णय को सही ठहराया...
इधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने का बिल्कुल सही फैसला लिया गया है। मैं इस फैसले का समर्थन करता हूं। उन्होंने इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ परिवार के नेताओं पर धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक बनाकर भगवान राम और 140 करोड़ भारतीयों का अपमान करने का आरोप लगाया।