फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ayodhya Ram Mandir: राम जन्म भूमि पर विदेशी हमले और हिंदू सेनाओं का मुंहतोड़ जवाब

Fri, 19 Jan 2024 10:10 PM IST
अमर शर्मा सर्जना शर्मा

सार

डॉ. ठाकुर प्रसाद वर्मा और डॉ. स्वराज्य प्रसाद गुप्ता ने अपनी किताब ‘अयोध्या का इतिहास और पुरातत्व’  में सरदार मिलेंडर उर्फ मिहिर कुल के अयोध्या आक्रमण और राजा गोविंद चंद्र के पराक्रम के विषय में लिखा है। कानूनी बहसों के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर इस किताब का भी हवाला दिया गया था। इन दोनों विद्वानों ने अपनी किताब में शिलालेखों के आधार पर यह प्रमाणित किया है कि यहां भगवान राम का मंदिर ही था। जन्मस्थल पर विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद जो पुरातात्विक प्रमाण मिले, उनका इन दोनों ने सूक्ष्मता से अध्ययन किया और प्रमाणित किया कि हिंदू राजाओं ने भगवान राम के पुत्र लव और कुश द्वारा बनवाए गए राम मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया। 
विज्ञापन
Ramlala - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

- सर्जना शर्मा
विज्ञापन

हम में से ज्यादातर लोग जानते हैं कि राम जन्म भूमि मंदिर 1528 में बाबर ने धवस्त किया और इस्लाम की परंपरा के अनुसार अपनी विजय के प्रतीक के रूप में वहां मस्जिद बनवाई, जो बाबरी मस्जिद के नाम से मशहूर हुई। राम जन्म भूमि यानी जहां भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम ने जन्म लिया। उत्तर प्रदेश की लोक परंपरा में छोटे बच्चे को लला कहा जाता है, इसलिए भगवान राम भी राम लला कहलाए। हिंदुओं को अपनी आस्था पर हमला कभी भी स्वीकार नहीं था। राम लला को दोबारा स्थापित करने और उनका मंदिर फिर से बनवाने के लिए अनेक खूनी संघर्ष हुए। लाखों हिंदुओं ने प्राणों का बलि दी। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाबर से पहले भी बहुत से विदेशी आक्रमणकारियों ने अयोध्या को निशाना बनाया था। हिंदुओं ने संगठित होकर हर बार मुंहतोड़ जवाब दिया। इतिहास की नज़र से राम जन्म भूमि और अयोध्या पर हुए विदेशी हमले और हमलावरों को परास्त करने के लिए हुए खूनी संघर्षो का लेखा-जोखा इस लेख में दिया जा रहा है। 
विज्ञापन


सोने की चिड़िया के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध भारत पर विदेशी आक्रमणकारियों की सदियों से नजर रही है। भारत की धन-दौलत लूटने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, धर्म, गौरव और राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीकों को नष्ट करना भी उनकी प्राथमिकता रहती थी। भगवान राम भारतीय संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहलाए। राम राष्ट्र पुरूष हैं। उनके जीवन मूल्य जन-जन के लिए आदर्श हैं। इसी आस्था को छिन्न-भिन्न करना विदेशी हमलावरों, लुटेरों की प्राथमिकता रही, ताकि भारतवासियों का मनोबल टूट जाए। 

सबसे पहला हमला अयोध्या पर यूनान के यवनों ने किया। ईसा से तीन शताब्दी पहले सरदार मिलेंडर ने अयोध्या पर हमला किया। वो जानता था कि राम मंदिर को तोड़े बिना भारत की आध्यात्मिक शक्ति को कमज़ोर नहीं किया जा सकता। भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा बनवाए गए मंदिर को मिलेंडर ने गिरा दिया। अपना आस्था के केंद्र पर हुए हमले को लेकर हिंदू बहुत आहत हुए। तीन महीने के भीतर उन्होंने संगठित हो कर मिलेंडर को सबक सिखाने की ठान ली। 

शुंग वंश के पराक्रमी राजा द्युमतसेन ने यूनानी हमलावर और उसकी सेना को घेर लिया। इस वीर राजा ने राम जन्मभूमि को मुक्त कराया। उसकी राजधानी कौशांबी को अपने कब्जे में किया। उसको और उसकी पूरी सेना को मौत के घाट उतार कर हिंदुओं की आस्था के अपमान का बदला लिया। जन्म स्थान मुक्त तो करा लिया गया, लेकिन विदेशी हमलावरों को खदेड़ते रहने के कारण मंदिर का दोबारा निर्माण नहीं हो पाया।

भारत के परम वैभवशाली सम्राट विक्रमादित्य ने ईसा से एक शताब्दी पूर्व फिर से भगवान राम का मंदिर बनवाने का प्रण लिया। शकों को भारत की सीमा से बाहर भगाने के बाद विक्रमादित्य ने अयोध्या की खोज आरंभ कराई। प्राचीन ग्रंथों के आधार पर अयोध्या की खोज के लिए विशेष टुकड़ियां भेजीं। सबसे पहले खोजा गया शेषनाथ मंदिर और फिर एक कड़ी मिली तो कड़ियां जुड़ती गईं। लक्ष्मण घाट के निकट ऊंचे टीले की खुदाई में प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले। कसौटी से बने चौरासी खंभे थे। इसी स्थान पर विक्रमादित्य ने विशाल मंदिर बनवाया। यही नहीं, पूरे भारत के प्रत्येक पंथ, जाति और समुदाय को अपने साथ जोड़ा और सबके मंदिर बनवाए। यही कारण है कि अयोध्या केवल हिंदुओं का नहीं, बल्कि जैन, बौद्ध और सिख आस्था का भी केंद्र है।

ग्यारहवीं शताब्दी वह काल था, जब महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण करने शुरू किए। गजनवी ने हिंदुओं के सबसे पहले और प्राचीन ज्योतिर्लिंग सोमनाथ को तोड़ा। मंदिर से मिली अथाह संपत्ति, हजारों गुलाम और लाखों हिंदू युवतियों को अपने साथ ले गया। गजनवी ने भारत पर एक नहीं, अनेक बार हमले किए। उसके भांजे सालार मसूद ने भी भारत पर आक्रमण किए। वह दिल्ली तक पहुंच गया। उसकी नजर अयोध्या तक पहुंची।

जब कौशल नरेश सुहेलदेव को ये समाचार मिला, तो उन्होंने आस-पास के सभी राजाओं को संगठित किया और सालार मसूद से मुकाबले के लिए कमर कस ली। राजसी सेनाओं के साथ अखाड़ों के मंहत, साधु-संत और उनके शिष्यों की सेनाओं ने सालार मसूद को धूल चटाने की ठान ली। सोमनाथ पर हुए हमले से हिंदू बहुत आहत थे। लगभग 15 लाख पैदल सैनिक और 10 लाख घुड़सवार अपने-अपने राजाओं के नेतृत्व में अयोध्या के पास बहराइच पहुंच गए। सालार मसूद अपने पिता सालार शाह के साथ बड़ा फौजी लश्कर लेकर बहराइच तक बहुत घमंड से इस यकीन के साथ आया कि हिंदुओं को हराना उसके बाएं हाथ का खेल है। लेकिन वो संगठित हिंदुओं की शक्ति नहीं जानता था। राजा सुहेल देव के नेतृत्व में 25 राजाओं की सेना और साधु-संतों ने सालार मसूद की सेना के छक्के छुड़ा दिए। जबरदस्त घेराबंदी कर उन्हें गाजर-मूली की तरह काट दिया। सात दिन तक चले भीषण युद्ध में सालार का एक भी सैनिक नहीं बचा। उसका सिर भी एक सैनिक ने धड़ से अलग कर दिया। राम जन्म भूमि तो क्या अयोध्या की सीमा तक भी वह पार नहीं कर पाया।
 
विदेशी इतिहासकार शेख अब्दुल रहमान चिश्ती ने सालार मसूद की जीवनी ‘मीरात-ए मसूदी’ में लिखा है- “इस्लाम के नाम पर जो अंधड़ अयोध्या, बहराइच तक आ पहुंचा था, वह सब नष्ट हो गया। इस लड़ाई में अरब, ईरान के हर घर का चिराग बुझ गया।“ राजा सुहेल देव के पराक्रम और हिंदू सेनाओं की बहादुरी के किस्से दूर-दूर तक पहुंचे। पच्चीस पराक्रमी राजाओं में गढ़वाल वंश के राजा मदनपाल और उनके योद्धा पुत्र गोविंदचंद्र भी थे। गोविंदचंद्र ने कई बरस तक अयोध्या पर राज किया। लगभग दो सौ बरस तक किसी विदेशी आक्रमणकारी ने अयोध्या की ओर आंख उठाने का भी साहस नहीं किया।
विज्ञापन


डॉ. ठाकुर प्रसाद वर्मा और डॉ. स्वराज्य प्रसाद गुप्ता ने अपनी किताब ‘अयोध्या का इतिहास और पुरातत्व’  में सरदार मिलेंडर उर्फ मिहिर कुल के अयोध्या आक्रमण और राजा गोविंद चंद्र के पराक्रम के विषय में लिखा है। कानूनी बहसों के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर इस किताब का भी हवाला दिया गया था। इन दोनों विद्वानों ने अपनी किताब में शिलालेखों के आधार पर ये प्रमाणित किया है कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर ही था। जन्मस्थल पर विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद जो पुरातात्विक प्रमाण मिले, उनका इन दोनों ने सूक्ष्मता से अध्ययन किया और प्रमाणित किया कि हिंदू राजाओं ने भगवान राम के पुत्र लव और कुश द्वारा बनवाए गए राम मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें