राम मंदिर को सजाने में अहम भूमिका निभाने वाली शकुंतला अपने बेटे के साथ।
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स्थानीय मालिन शकुंतला का योगदान
राम मंदिर जाने वाले मुख्य रास्ते पर सबसे प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी मंदिर के चौराहे पर शकुंतला देवी पिछले 18 सालों से माला-फूल बेचने का काम करती हैं। उनके साथ उनके बेटे ने मंदिर के संपूर्ण परिसर को सुगंधित पुष्पों से सजाया था। इन फूलों को यह बात ध्यान में रखते हुए चुना गया था कि लंबे समय तक इनकी खुशबू हवा में तैरती रहे।
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए पवित्र माने जाने वाले पौधों और फूलों को भी मंदिर की सजावट में इस्तेमाल में लाया गया था। इसमें सबसे प्रमुख नाम तुलसी, मनोकामिनी और अशोक के वृक्ष हैं। इसी प्रकार कई अन्य जड़ी-बूटियों के पौधों को भी मंदिर को सजाने में उपयोग किया गया। पूरी सजावट प्रक्रिया के दौरान मंदिर की पवित्रता का ध्यान रखा गया।
कितने प्रकार के पुष्प
जानकारी के अनुसार, राम मंदिर को सजाने के लिए आठ रंग के गुलाब, छह रंग के गुलबहार, छह प्रकार के ऑर्किड, चार रंग के लिली और 20 विशेष प्रकार के सुगंध रखने वाले पुष्पों का उपयोग किया गया था। 21 हजार लड़ियों के साथ-साथ 90 हजार बंडल में फूलों को लाकर मंदिर को सजाया गया था।