क्या आप सोच सकते हैं कि चुनाव अपने शबाब पर है और टीम मोदी प्रचार का पूरा तरीका बदलकर नये प्रयोग का रिस्क उठाने जा रही है? जी हां, यही हुआ 14 फरवरी को सुबह केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री पीयुष गोयल ने तय कर लिया था कि प्रचार सामग्री में सबकुछ नया कर देना है। पीयुष गोयल ने पीयुष पांडे समेत अन्य सहयोगियों को निर्देश देना शुरू कर दिया था और दो-तीन दिन के भीतर पार्टी को नए जोश-खरोश के साथ दिखाने की कोशिश शुरू हो गई थी।
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यही टीम मोदी, टीम शाह है, जिसने बड़े-बड़े पंडितों के ज्ञान और आंकलन पर पानी फेर दिया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उत्तरप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष केशव मोर्या की टीम हमेशा लगी रही। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव करो या मरो की रणनीति पर अंजाम दिया गया। सोशल मीडिया से लेकर बूथ प्रबंधन तक में भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा अध्यक्ष ने गैर जाटव, गैर यादव और गैर अल्पसंख्यक समुदाय की सोशल इंजीनियरिंग के सभी दांव अपनाए। तीन तलाक के मुद्दे पर अल्पसंख्य समाज की महिलाओं तक अपनी अपील पहुंचाई।
कोइरी, कुर्मी, पटेल, सैनी, पासी, धोबी, राजभर, गड़ेरिया, नाई, केवट, मुशहर, निषाद(मल्लाह), कुशवाहा, समेत अन्य जातियों के लोगों को पार्टी चुपचाप जोड़ती रही। केशव मौर्य को उत्तरप्रदेश की कमान देने से लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य तक जोडऩे, अनुप्रिया पटेल को महत्व देने में भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में ध्रुवीकरण से परहेज किया तो चुनाव के केन्द्रीय उत्तरप्रदेश में पहुंचते ही इस दांव को अजमाने से नहीं चूकी।
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प्रधानमंत्री आवास योजना का आमजन फायदा उठा रहे हैं
फाइल फोटो: नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी
वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकास की रुपरेखा जनता तक सीधा संदेश देने में सफल रही। यशवंत सिन्हा का साफ कहना है कि नोटबंदी का निर्णय आर्थिक नहीं था। यह राजनीतिक निर्णय था। पूर्व वित्त सचिव डीके मित्तल भी इससे सहमत हैं। हुआ भी यही। जनता नोटबंदी के बाद लाइन में जरूर खड़ी रही, लेकिन वह केन्द्र सरकार के निर्णय के साथ रही। चुनाव में कहीं भी इसने प्रतिकूल छाप नहीं छोड़ा। जनता ने केन्द्र सरकार के आश्वासन पर पूरा भरोसा किया। नोटबंदी अमीर और गरीब के बीच का विषय बन गई।
केन्द्र सरकार की अन्य योजनाएं
प्रधानमंत्री आवास योजना का आमजन फायदा उठा रहे हैं। सबके लिए आवास का प्रचार-प्रसार खूब हुआ है। जनता के बीच शहरी जीवन को ध्यान में रखकर स्मार्ट सिटी योजना, सबके लिए ऊर्जा का लक्ष्य, बिजली की आपूर्ति, मंहगाई पर नियंत्रण, सब्सिडी का लोगों के खाते में जाना, गरीब परिवारों तक रसोई गैस कनेक्शन का मुफ्त वितरण, शौचालय और स्वच्छता अभियान जैसी केन्द्र सरकार की योजनाओं ने जनता के बीच अच्छी पैठ बनाई।
भाजपा की साफगोई
पार्टी ने राम मंदिर के मुद्दे से मुंह नहीं चुराया। संवैधानिक तरीके से घोषणा पत्र में राम मंदिर के निर्माण का जिक्र, गन्ना किसानों को भुगतान, बिजली बिल पर घोषणा आदि ने सामाजिक समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री का मंच से उत्तरप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचारियों तथा बाहुबलियों को जेल में डालने की ललकार ने जनता के बीच में भरोसा जताया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, कलराज मिश्र समेत अन्य नेताओं की जनसभा तथा प्रचार-प्रसार की रणनीति ने भाजपा की जीत को आसान कर दिया।
संघ ने संभाली कमान
इलाहाबाद में चाहे ज्ञानेश्वर शुक्ला हों या बनारस में संघ के प्रचारक। मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, कानपुर मंडल। गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारकों, स्वयं सेवकों ने कमान संभाल रखी थी। व्यापारी वर्ग में गहरी पैठ रखने वाले संघ ने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में पूरी जान लड़ा दी। प्रधानमंत्री की हर जनसभा का वातावरण तैयार करने से लेकर भाजपा के राजनीतिक अभियान को धार देने में स्वयं सेवकों की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही। नाराज वर्ग को मनाने, पार्टी के कामकाज से जोडऩे में संघ ने अहम भूमिका निभाई और अब नतीजा सामने है।