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Bundi: कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने दी जानकारी, ‘श्री अन्न’ को दैनिक आहार में शामिल कर किसान कैसे कमाएं मुनाफा

Sat, 04 Mar 2023 07:54 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी

सार

कृषि विज्ञान केंद्र बूंदी पर ‘प्राकृतिक खेती एवं मोटे अनाज पर जागरूकता’ के लिए कार्यशाला का शुक्रवार को आयोजन किया गया। इसमें बून्दी जिले के 291 प्रगतिशील कृषक व कृषक महिलाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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प्राकृतिक खेती एवं मोटे अनाज पर जागरूकता कार्यशाला - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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‘प्राकृतिक खेती एवं मोटे अनाज पर जागरूकता’ कार्यशाला का शुभारम्भ केंद्र पर उपस्थित अतिथिगणों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर सरस्वती वंदना से किया। तत्पश्चात कृषि विश्वविद्यालय, कोटा का कुलगीत का वादन किया गया। केंद्र के अध्यक्ष प्रो. हरीश वर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया है। इसको भारत में ‘श्री अन्न’के रूप में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश में बाजरा, ज्वार, रागी, सांवा, कंगनी, कोदा, कुटकी व चीना के उत्पादन को बढ़ाकर इन्हें दैनिक आहार में शामिल करना एवं तैयार उत्पादों को निर्यात में बढ़ावा दिया जाना है।

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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर चर्चा
प्राकृतिक खेती पर चर्चा करते हुए कीट प्रबंधन में लाभदायक मित्र कीटों की जानकारी देते हुए इनके संरक्षण करने की सलाह दी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलने से उत्पादित उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी एवं दूषित पर्यावरण में सुधार होकर पारिस्थितक तंत्र स्वच्छ बनेगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एन.एल. मीणा, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, हिण्डोली ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती की तुलनात्मक जानकारी दी एवं वर्तमान में की जा रही रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। प्राकृतिक खेती के चार मुख्य स्तंभ जीवामृत, बीजामृत, आच्छादन एवं वापसा के बारे में चर्चा कर प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया।

उत्पादन तकनीक की जानकारी दी
डॉ. भवानीशंकर मीणा, सह आचार्य शस्य विज्ञान, उम्मेदगंज, कोटा ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए कृषि अनुसंधान केंद्र, उम्मेदगंज, कोटा में जैविक खेती पर किए जा रहे पिछले पांच वर्ष के अनुभवों को कृषकों के साथ साझा किया। डॉ. राकेश कुमार बैरवा, सह आचार्य शस्य विज्ञान, कृषि विज्ञान केन्द्र, कोटा ने हाड़ौती में मोटे अनाज उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए इनके उत्पादन तकनीकि की जानकारी दी। प्राकृतिक खेती परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. घनश्याम मीणा ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्राकृतिक खेती पर विस्तृत जानकारी देने के साथ ही केन्द्र द्वारा किए जा रहे प्राकृतिक खेती पर कार्यों के बारे में बताया।
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बाजरे का केक और ज्वार के बिस्किट वितरित किए
मिलेट्स कार्यक्रम प्रभारी अधिकारी डॉ. कमला महाजनी ने मोटे अनाज के मानव आहार में महत्व एवं इनसे बनने वाले मूल्य संवर्धित उत्पादों की जानकारी दी। कार्यशाला में आये हुए अतिथियों को नाश्ते में बाजरे से तैयार केक व ज्वार के बिस्कुट वितरित किए गए। दुर्गालाल मौर्य, उपनिदेशक सब्जी उत्कृष्टता केन्द्र, बूंदी ने जिले में सब्जी उत्पादन बढ़ावा देने के लिए कृषकों को स्वयं के बीजों से पौध तैयार करने में विभागीय सहयोग की जानकारी दी। राधेश्याम मीणा, उपनिदेशक उद्यान विभाग, बूंदी ने उद्यानिकी फसलों में प्राकृतिक खेती को अपनाने की सलाह देते हुए विभाग द्वारा संचालित विभिन्न अनुदान योजनाओं की जानकारी दी।

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