मृतका के परिजनों और समाज के लोगों ने कहा ब्लड की नस कटने से विवाहिता की मौत हुई है, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हो गई है। बावजूद इसके पुलिस लापरवाह चिकित्सकों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। परिजनों की मांग थी कि नसबंदी शिविर के लिए अधिकृत संबंधित एनजीओ का एमओयू निरस्त किया जाए और लापरवाह डॉक्टरों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतका के आश्रितों को आर्थिक सहायता भी दी जानी चाहिए।
कार्रवाई की मांग को लेकर मृतका के परिजन और समाज के लोग चार दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों न चिकित्सकीय टीम को गिरफ्तार, मृतका के आश्रितों को 25 लाख का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की थी। चार दिन तक प्रशासन परिजनों को मानाने का प्रयास करता रहा, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे।
पांचवें दिन मंगलवार को एक बार फिर प्रशासन और मृतका के परिजनों के बीच मांगों को लेकर वार्ता हुई। इसमें प्रशासन और मृतका के परिजनों के बीच 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता , परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने की बात पर सहमति बन गई। प्रशासन ने परिजनों को जांच के बाद लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया है।