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राजस्थान के सियासी गणित में इस वजह से मायने रखता है जाट वोट बैंक

Mon, 15 Oct 2018 01:09 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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जाट आंदोलन की फाइल फोटो
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राजस्थान में राजनीति अपने बदलाव के कारण हमेशा से चर्चा में रही है। पिछले 25 सालों से यहां पर एक ट्रेंड चल पड़ा है, जिसके चलते पांच साल के बाद सत्ताधारी दल को हार का सामना करना पड़ता रहा है। 
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इस बार भाजपा के सामने इस ट्रेंड को तोड़ने की कठिन चुनौती है। दूसरी ओर कांग्रेस राजस्थान के उसी ट्रेंड पर विश्वास करके चल रही है, जिसके अनुसार सत्ताधारी दल की हार तय है।

राजस्थान की राजनीति में यूं तो कई अहम मुद्दे हैं, लेकिन यहां लंबे समय से किसान और गाय के मुद्दे पर वोट पड़ता रहा है। एक अनुमान के मुताबिक राजस्थान के किसानों पर औसतन 50 हजार रुपये का कर्ज है।
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राजस्थान के सियासी गणित में जाट वोट अहम है। वैसे जाट वोटर 12 से 14 फीसदी ही हैं, लेकिन इनके वोट एकमुश्त पड़ते हैं। राजस्थान में झुंझनू, नागौर, सीकर, भरतपुर और जोधपुर को जाट बेल्ट कहा जाता है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का सबसे ज्यादा फोकस इन्हीं जाट मतदाताओं पर है।

जाट वोट के अलावा राजस्थान में राजपूत, ब्राह्मण, मीणा, गुर्जर वोट बेहद अहम हैं लेकिन भाजपा का राजपूत समुदाय में अच्छा खास वर्चस्व है इन्हें भाजपा का कोर वोटर माना जाता है। विधानसभा चुनाव में हर बार कम से कम 15-17 विधायक राजपूत समुदाय से चुनकर आते हैं। मौजूदा विधानसभा में राजपूत समुदाय के 27 विधायक हैं, जिनमें 24 बीजेपी के हैं। यूं तो राजपूत समुदाय की आबादी ज्यादा नहीं है, लेकिन ये बड़ी संख्या में सीटों पर खेल बनाते और बिगाड़ते हैं।
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