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राजस्थान में फंसे 7500 छात्रों को वापस लाने के लिए यूपी सरकार ने भेजी 250 बसें, थर्मल स्क्रीनिंग के बाद होगी वापसी

Fri, 17 Apr 2020 09:35 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, कोटा
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coronavirus - फोटो : PTI
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देश में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाकर तीन मई तक कर दिया गया है। इस कारण विभिन्न राज्यों में छात्र और प्रवासी मजदूर फंस गए हैं। ये लोग अपने गृह राज्य जाने के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं। वहीं, इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को राजस्थान में फंसे अपने छात्रों को निकालने के लिए 250 बसों को भेजा है। 

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राजस्थान के कोटा जिले में उत्तर प्रदेश के लगभग 7500 छात्र पढ़ रहे हैं, जो लॉकडाउन बढ़ने की वजह से वहीं फंसे हुए हैं। इन छात्रों की मांग थी कि उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें यहां से बाहर निकालें, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 250 बसों को कोटा भेजा है। इन बसों के माध्यम से वहां फंसे लगभग 7500 छात्र अपने घर वापस लौटेंगे।  

यूपी सरकार के इस कदम की राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रशंसा की और कहा कि अन्य राज्य सरकारों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे लॉकडाउन के दौरान इस शहर में फंसे अपने राज्यों के छात्रों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाए।
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सीएम गहलोत ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि जैसा कि यूपी सरकार ने राजस्थान के कोटा शहर में रहने वाले यूपी के छात्रों को वापस बुलाया है, यह अन्य राज्यों के छात्रों के लिए भी किया जा सकता है। कोटा में छात्रों को उनसे संबंधित राज्य सरकार की सहमति पर उनके गृह राज्यों में भेजा जा सकता है ताकि ये युवा लड़के और लड़कियां घबराएं नहीं और न ही तनाव महसूस करें।
 


अपने इंजीनियरिंग और चिकित्सा के कोचिंग सेंटरों के लिए मशहूर कोटा शहर में उत्तर प्रदेश के लगभग 7500 छात्र विभिन्न छात्रावासों में रह रहे हैं। कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए पिछले महीने लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही विभिन्न राज्यों के छात्र अपने घर वापस लौटने के लिए चिंतित हो रहे हैं। 

एक अधिकारी ने बताया कि महामारी के बीच यहां फंसे छात्रों द्वारा मंगलवार को #SendUsBackHome नाम से एक सोशल मीडिया कैंपेन चलाया गया, जिसके बाद यूपी सरकार ने लगभग 250 बसों को भेजने का फैसला किया, ताकि यहां फंसे यूपी के लगभग 7500 छात्रों को उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सके।

कोटा जिला कलेक्टर ओम कसेरा ने राज्य स्तरीय निर्णय के बाद, एएसपी राजेश मिल के साथ व्यवस्थाओं को लेकर समन्वय करने के लिए एडीएम (प्रशासन) नरेंद्र गुप्ता को नियुक्त किया।

अधिकारियों ने कहा कि यूपी से बसें शुक्रवार शाम को कोचिंग हब तक पहुंचनी शुरू हो गई और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद छात्रों को अपने गृहनगर ले जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि केवल 30 छात्रों को एक बस में चढ़ने की अनुमति दी जाएगी ताकि सामाजिक दूरी को सुनिश्चित किया जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

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कोटा में फंसे बिहार के छात्रों ने सीएम नीतीश से लगाई गुहार

वहीं, बिहार के अलग-अलग जिलों से कोटा पढ़ने गए छात्र लॉकडाउन के कारण वहां फंस गए हैं। इन छात्रों का कहना है कि वे बिहार आना चाहते हैं। छात्रों ने बिहार सरकार से मांग की है कि वह उन्हें कोई प्रबंध कर उनके घर तक पहुंचाए। अब उनके पास राशन खरीदने के लिए पैसे तक नहीं है। 

ये छात्र वीडियो का सहारा लेकर अपना दर्द बिहार तक पहुंचा रहे हैं। भागलपुर के एक छात्र ने बताया कि हम यहां बहुत ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं। खाने के साथ-साथ दवा आदि लेने में भी डर का माहौल बना हुआ है। जरूरत का सामान भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यहां अब डर लगने लगा है। 

समस्तीपुर के एक छात्र ने बताया कि अब खाने की दिक्कत बढ़ने लगी है। मुझे जरूरत के सामान के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। हम आशा करते है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ व्यवस्था करेंगे और अपने राज्य बुलाएंगे।

छात्रों का कहना है कि बिहार सरकार को हमें वापस लाने के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। वह यहां बढ़ते मामलों से चिंतित हैं और उनमें डर का माहौल है। छात्रों ने कहा कि आशा है कि राज्य सरकार हम लोगों के लिए कुछ करेगी। 
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