उदयपुर की बारूद वाली होली का एक दृश्य
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उदयपुर जिले के मेनार गांव में मंगलवार देर रात बारूद की होली का आयोजन होगा। हर साल की तरह इस बार भी योद्धाओं की इस होली में मेवाड़ की धरती पर इतिहास में हुए युद्धों की दास्तां को जीवंत किया जाएगा।
होली के अगले दिन ही जमरा बीज (यम द्वितीया) पर मनाया जाने वाला यह उत्सव वास्तव में विजयोत्सव सा लगता है। इस उत्सव को मनाए जाने के पीछे इस जगह का इतिहास है जिसके मुताबिक भीण्डर क्षेत्र के ब्राह्मणों ने राष्ट्र और धर्म रक्षार्थ शास्त्र के स्थान पर शस्त्र धारण किए और 17वीं सदी में औरंगजेब की मुगल सेना से लोहा लिया था और उन्हें मेवाड़ की भूमि से लौटने पर मजबूर किया।
उसी स्मृति में मेनार गांव के मुख्य ओंकारेश्वर चबूतरे के यहां पांचों रास्तों से अलग-अलग दल एक साथ हाथों में बंदूकें व तलवारें लिए चबूतरे की तरफ कूच करते हैं जिसके बाद भव्य आतिशबाजी और हवाई फायर किए जाते हैं। इसके बाद मुख्य चौराहों पर प्रसिद्ध तलवारों की जबरी गेर खेली जाती है।