फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारूद की होली में गूंजेगी तोपे !

Tue, 14 Mar 2017 05:45 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
विज्ञापन
उदयपुर की बारूद वाली होली का एक दृश्य - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
उदयपुर जिले के मेनार गांव में मंगलवार देर रात बारूद की होली का आयोजन होगा। हर साल की तरह इस बार भी योद्धाओं की इस होली में मेवाड़ की धरती पर इतिहास में हुए युद्धों की दास्तां को जीवंत किया जाएगा। 
विज्ञापन


होली के अगले दिन ही जमरा बीज (यम द्वितीया) पर मनाया जाने वाला यह उत्सव वास्तव में विजयोत्सव सा लगता है। इस उत्सव को मनाए जाने के पीछे इस जगह का इतिहास है जिसके मुताबिक  भीण्डर क्षेत्र के ब्राह्मणों ने राष्ट्र और धर्म रक्षार्थ शास्त्र के स्थान पर शस्त्र धारण किए और 17वीं सदी में औरंगजेब की मुगल सेना से लोहा लिया था और उन्हें मेवाड़ की भूमि से लौटने पर मजबूर किया।

उसी स्मृति में मेनार गांव के मुख्य ओंकारेश्वर चबूतरे के यहां पांचों रास्तों से अलग-अलग दल एक साथ हाथों में बंदूकें व तलवारें लिए चबूतरे की तरफ कूच करते हैं जिसके बाद भव्य आतिशबाजी और हवाई फायर किए जाते हैं। इसके बाद मुख्य चौराहों पर प्रसिद्ध  तलवारों की जबरी गेर खेली जाती है। 
विज्ञापन

 
Trending Videos
विज्ञापन

मुगलों पर जीत की खुशी में मनाया जाता है यह उत्सव

फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
इस आयोजन के दौरान सभी पुरुष धोती कुर्ता, लाल पगड़ी, सिर पर कलंगी धारण किए पारम्परिक वेशभूषा में शरीक होंगे। वहीं, महिलाएं वीर रस के मंगल गीत गाती हुई मशाल के साथ योद्धाओं का हौंसला बढ़ाएंगी। जब मशालों के साथ बंदूकों और तलवारों से सजे युवा दौड़कर मुख्य चौक में पहुंचते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे गांव पर चारों ओर से हमला हुआ है।

युवा योद्धा गांव की रक्षा के लिए जमा हो जाते हैं। जुलूस में सजी-धजी वीरांगनाएं सिर पर कलश लिए चौक में पहुंचेंगी। इस दौरान गांव का जैन समाज लोगों पर गुलाल बरसाता है। रणबांकुरे ढोल की थाप और गांव के युवा होली मंगलवार को जमरा घाटी की ओर बढ़ेंगे जहां पहुंचने के बाद वो कतारबद्ध हो जाएंगे। महिलाएं शौर्य और शृंगार के गीत गाती हुई योद्धाओं की कतार के बीच से होकर होली व शहीदों को श्रद्धांजलि देंगी। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें