राजस्थान के उदयपुर जिले में वन विभाग की ओर से तैयार हर्बल गुलाल
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होली खेलने वालों को अक्सर यह चिंता रहती है कि रंग-गुलाल का उन पर कोई साइड इफेक्ट नहीं हो जाए। कोई स्किन प्राॅब्लम नहीं हो जाए। यह चिंता बाजिव भी है। आजकल बाजार में उपलब्ध रंग-गुलाल में केमिकल का उपयोग होता है। जिसके सम्पर्क में आने से कई तरह स्किन प्राॅब्लम और अन्य परेशानी हो जाती है।
ऐसे में राजस्थान के उदयपुर जिले में वन विभाग की ओर से तैयार करवाई जा रही हर्बल गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही हैं। इस साल होली पर विभाग के पास करीब तीन क्विंटल हर्बल गुलाल का आर्डर है।
देशभर में हर्बल उत्पादों के प्रति जागरूकता को देखते हुए राजस्थान के वन विभाग ने उदयपुर जिले के कुछ गांवों में हर्बल गुलाल का उत्पादन प्रयोग के तौर पर वर्ष 2010 में शुरू किया। पहले साल मात्र 15 किलोग्राम गुलाल चौकड़िया में तैयार हुई। कुछ बची लेकिन, बाद में धीरे-धीरे मांग बढ़ती गई। स्थिति यह हो गई है कि विभाग जितनी हर्बल गुलाल तैयार करवाता है, सारी खप जाती है। विभाग की ओर से उदयपुर में बिक्री काउंटर भी स्थापित किए जाते है। हर्बल गुलाल मांग राजस्थान के विभिन्न इलाकों समेत दिल्ली, गुजरात में भी है।