अब हर साल बारिश के मौसम में गौरम घाट, जोग मंडी, रावली टॉडगढ़, फुलाद के मनमोहक नजारे देखने का मेवाड़ वासियों का सपना अधूरा रह जाएगा। नए प्लान के मुताबिक अब यह ट्रेन मावली मारवाड़ के बीच न चलकर गोरमघाट से मारवाड़ जंक्शन तक चलेगी।
देश आजाद होने से 14 वर्ष पहले चलाई गई उदयपुर-जोधपुर हेरिटेज ट्रेन शुक्रवार को अपना आखिरी फेरा पूरा कर मेवाड़ से अलविदा हो गई। रियासत काल में यह ट्रेन मेवाड़ और मारवाड़ के बीच सेतु की भूमिका अदा करती थी।
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नए प्लान के मुताबिक अब यह ट्रेन मावली मारवाड़ के बीच न चलकर गोरमघाट से मारवाड़ जंक्शन तक चलेगी। अब हर साल बारिश के मौसम में गौरम घाट, जोग मंडी, रावली टॉडगढ़, फुलाद के मनमोहक नजारे देखने का मेवाड़ वासियों का सपना अधूरा रह जाएगा।
मालूम हो कि खामली घाट से गोरम घाट होकर फुलाद तक अरावली पर्वतमाला के बीच आने जाने का जरिया सिर्फ ट्रेन है। कुदरत की इस अनमोल विरासत को बचाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत और उसके बाद बनी राजस्थान सरकार ने सड़क मार्ग बनने की जुर्रत नहीं की, लेकिन अब तेज रफ्तार से चलने वाली दुनिया को विरासत संरक्षण के बजाय बुलेट ट्रेन की जरूरत है। लिहाजा मावली से खामलीघाट तक बड़ी लाइन आमान परिवर्तन की योजना के मद्देनजर मीटर गेज की इस ट्रेन का संचालन बंद कर दिया गया।