डूंगरपुर से लगातार दूसरी बार निर्वाचित विधायक गणेश लाल घोघरा पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए कांग्रेस आलाकमान ने नोटिस जारी किया है। पार्टी ने घोघरा पूछा कि क्यों न आप को पार्टी से निकाल दिया जाए? विधायक गणेश घोघरा से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नोटिस कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा ने दिया है। घोघरा पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी लगाया।
घोघरा पर आरोप है कि उन्होंने बांसवाड़ा डूंगरपुर लोकसभा सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी के साथ हुए गठबंधन को कबूल न करते हुए उस प्रत्याशी का समर्थन और सहयोग किया जिसने स्वयं पार्टी आलाकमान के फैसलों का विरोध किया था। दरअसल बांसवाड़ा डूंगरपुर सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ने का आदेश कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान के पूर्व जनजाति मंत्री अर्जुन बामनिया को दिया था।
बामनिया ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी ने अरविंद डामोर को टिकट दिया। डामोर ने शुभ मुहूर्त में अपना नामांकन दाखिल कर दिया था, लेकिन नामांकन वापसी के दिन 8 अप्रैल से एक दिन पहले कांग्रेस संगठन ने भारतीय आदिवासी पार्टी से गठबंधन का एलान कर दिया। तय किया गया कि बांसवाड़ा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद डामोर अपना नामांकन वापस लेकर बाप प्रत्याशी राजकुमार रॉट को समर्थन देंगे।
मगर कांग्रेस संगठन के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए अरविंद डामोर नामांकन वापसी का समय समाप्त होने तक भूमिगत हो गए। डामोर ने इसके बाद भी खुद को रिटायर घोषित नहीं किया। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था, लेकिन फिर भी उन्होंने चुनाव लड़ा। डूंगरपुर विधायक गणेश लाल घोघरा पर आरोप है कि उन्होंने बाप पार्टी के गठबंधन प्रत्याशी राजकुमार रोट को सहयोग करने के बजाय अरविंद डामोर का साथ दिया।
इस बीच एक घटना और हुई। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा बाप पार्टी प्रत्याशी राजकुमार रोट के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने 24 अप्रैल को डूंगरपुर बांसवाड़ा के दौरे पर आए थे। उन्होंने डूंगरपुर विधायक गणेश लाल घोघरा को मिलने बुलाया था लेकिन घोघरा ने मिलने से इंकार कर दिया था।