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Rajasthan: उदयपुर में आयोजित देश भर के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन संपन्न, इन बिंदुओं पर हुई चर्चा

Sun, 16 Oct 2022 10:50 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

सम्मेलन में पावर सेक्टर के विकास, 24×7 पावर सप्लाई, पावर सेक्टर रिफॉर्म्स, राइट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर विषय पर चर्चा की गई। विभिन्न राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों ने  प्रत्येक प्रासंगिक मुद्दे पर अपने सुझाव दिए।
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उदयपुर में उर्जा मंत्रियों का सम्मेलन संपन्न - फोटो : Social Media
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विस्तार
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उदयपुर में चल रहा देश भर के ऊर्जा मंत्रियों का दो दिवसीय मंथन शनिवार शाम को संपन्न हो गया। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री कृष्णपालसिंह गुर्जर सहित विभिन्न राज्यों के उप मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्रियों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिव भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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सम्मेलन के दौरान, वितरण क्षेत्र की वित्तीय व्यवहार्यता और स्थिरता, बिजली प्रणालियों के आधुनिकीकरण, उन्नयन और निवेश की आवश्यकता और बिजली क्षेत्र के सुधारों सहित 24x7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बिजली प्रणालियों के विकास पर ध्यान देने के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। राज्यों ने इनमें से प्रत्येक प्रासंगिक मुद्दे पर अपने इनपुट और सुझाव प्रदान किए। 


इस दौरान विद्युत क्षेत्र मूल्य श्रृंखला में वित्तीय और परिचालन स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वितरण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए कई बातों पर जोर दिया गया। इसमें समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) हानियों को कम करने, लागत प्रतिबिंबित टैरिफ सुनिश्चित करने, सब्सिडी का लेखांकन और राज्य सरकारों की ओर से सब्सिडी का समय पर भुगतान आदि प्रमुख रहे हैं।

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हानियों में कमी के लिए उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और ऊर्जा लेखांकन प्रणाली स्थापित करने के लिए सिस्टम मीटरिंग के परिनियोजन में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की गई। साथ ही यह भी सहमति हुई कि विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को वास्तविक ऊर्जा खपत के आधार पर केवल प्रति यूनिट के आधार पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। अधिकांश राज्यों ने अपनी वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय और प्रचालन दक्षता में सुधार के लिए संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत अपनी संबंधित कार्य योजना पहले ही प्रस्तुत कर दी है। इस दौरान कहा गया कि राज्यों को 40 गीगावाट के समग्र लक्ष्य को पूरा करने के लिए तेजी से सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाने का प्रयास करना चाहिए।


सम्मेलन में कहा गया कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बीईएसएस और पंप स्टोरेज हाइड्रो परियोजनाओं सहित ऊर्जा भंडारण का कार्यान्वयन प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। ग्रीन हाइड्रोजन, ऑफ शोर विंड, ऑफ ग्रिड और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) अनुप्रयोगों सहित भविष्य की प्रौद्योगिकियों को अनुकूलित करने की आवश्यकता है।


साथ ही देश का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए चौबीस घंटे बिजली की आपूर्ति जरूरी है। साथ ही अगले दशक बिजली की मांग दोगुनी होने की संभावना है। इसे पूरा करने के लिए 50 लाख करोड़ रुपए से अधिक के आवश्यक पूंजी निवेश की जरूरत है।

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