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डॉक्टर नहीं है इसलिए वेंटिलेटर मशीनें लौटाने की तैयारी

Sun, 12 Mar 2017 03:12 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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हरिदेव जोशी जिला चिकित्सालय में रखे वेंटिलेटर - फोटो : amar ujala
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डूंगरपुर के हरिदेव जोशी जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की कमी यहां मासूमों की सेहत पर भारी पड़ रही है। ऐसे में यहां आवंटित दो वेंटिलेटर मशीन भी दिखावा साबित हो रही है। ऐसे में मशीनों को लौटाने की तैयारी अस्पताल प्रशासन कर रहा है। 
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करीब आठ महीने पहले हरिदेव जोशी जिला चिकित्सालय में 16 लाख रुपए की दो वेंटिलेटर मिली थी। इनका लाभ श्वांस रोग से पीड़ित बच्चों को मिलता उससे पहले ही इन वेंटिलेटरों को उदयपुर के चिकित्सालय में भेजने की तैयारी कर ली गई है। इसका कारण जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी होना बताया जा रहा है। 

चिकित्सालय में डॉक्टरों के 73 पद स्वीकृत हैं लेकिन वर्तमान में यहां केवल 26 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें भी शिशु रोग विशेषज्ञ की संख्या मात्र 3 है। जिनमें से दो डॉक्टर ओपीडी में रहते हैं और एक डॉक्टर आपातकालीन यूनिट में सेवाएं देता है। ऐसे में यदि यहां बच्चों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा शुरू की जाती है तो एक वेंटिलेटर पर एक डॉक्टर रहना अनिवार्य है ताकि वह वेंटिलेटर पर रहे बच्चे की नियमित मॉनिटरिंग कर सके। 
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ऐसा होना संभव नहीं था तो रविन्द्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज ने यहां आए दोनों वेंटिलेटरों को उदयपुर अस्पताल में शिफ्टिंग करने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि हरिदेव जिला चिकित्सालय में रोजाना करीब 150 बच्चे बीमारियों के उपचार के लिए आते हैं। इनमें से 20 बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें भर्ती करना पड़ता है। सर्दी के मौसम में श्वांस रोग से जुड़े बच्चे ऐसे आते हैं जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होती है, लेकिन वेंटिलेटर के अभाव में उन्हें आईसीयू में ही भर्ती करना पड़ता है।
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