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उदयपुर: मंदिर में प्रसादी करने पर परिवार का हुक्का-पानी बंद, लगाया ₹1.51 लाख जुर्माना; 11 लोगों पर केस

Sat, 05 Sep 2026 05:38 PM IST
उदयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

उदयपुर में मंदिर में प्रसादी आयोजन को लेकर एक परिवार पर पंचायत द्वारा 1.51 लाख रुपये का जुर्माना लगाने और जुर्माना नहीं देने पर सामाजिक बहिष्कार करने का आरोप लगा है। परिवार ने मारपीट और श्मशान का रास्ता रोकने के भी आरोप लगाए हैं।
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गोगुंदा थाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उदयपुर जिले के गोगुंदा थाना क्षेत्र से सामाजिक बहिष्कार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन करने से नाराज पंचायत ने एक परिवार पर 1 लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। जुर्माना नहीं देने पर परिवार का कथित तौर पर हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट भी की गई।

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पंचायत के 5 प्रमुख पंचों समेत 11 लोगों पर मामला दर्ज
मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश की पालना करते हुए पंचायत के पांच प्रमुख पंचों समेत 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब पीड़ित परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

मंदिर में प्रसादी करने पर जताई आपत्ति, अगले दिन बुलाई पंचायत
पुलिस के अनुसार, नेतावतों की भागल, भूताला निवासी गणेश सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि 24 मई 2026 को गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन किया गया था। आयोजन के बाद गांव के किशोर सिंह, तेज सिंह, नवल सिंह, मोहन सिंह, भैरू सिंह, चंदन सिंह, राम सिंह, कालू सिंह, लहर सिंह, कान सिंह और धर्मेंद्र ने इस पर आपत्ति जताई।
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आरोप है कि इन लोगों ने कहा कि उनकी अनुमति के बिना मंदिर में प्रसाद का आयोजन क्यों किया गया। इसके बाद अगले दिन पंचायत बुलाई गई और परिवार पर 1.51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

जुर्माना नहीं दिया तो परिवार का कथित सामाजिक बहिष्कार
पीड़ित परिवार ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो पंचायत की ओर से परिवार का सामाजिक बहिष्कार किए जाने का आरोप है। गणेश सिंह के मुताबिक, गांव के अन्य लोगों को भी उनके परिवार से मेल-जोल और किसी तरह का संपर्क नहीं रखने की हिदायत दी गई।

पीड़ित का आरोप है कि पंचायत के इस फैसले का विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। साथ ही मंदिर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने से भी परिवार को रोका गया।

परिवार में मौत के बाद श्मशान का रास्ता रोकने का भी आरोप
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब 29 मई 2026 को परिवार में एक सदस्य की मृत्यु हो गई। पीड़ित का आरोप है कि अंतिम संस्कार के लिए श्मशान जाने वाले रास्ते को भी बंद कर दिया गया, जिससे परिवार को अंतिम संस्कार में परेशानी का सामना करना पड़ा।

पुलिस में सुनवाई नहीं हुई तो परिवार पहुंचा कोर्ट
पीड़ित परिवार का कहना है कि उसने मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस से लेकर उच्च अधिकारियों तक की, लेकिन लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट के आदेश पर 3 सितंबर को दर्ज हुई एफआईआर
एएसआई विनेश कुमार के अनुसार, कोर्ट के आदेश की पालना में 3 सितंबर को 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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