बाल विवाह रुकवाने के लिए समझाते अधिकारी
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राजस्थान के उदयपुर जिले के सलूंबर क्षेत्र की ग्राम पंचायत ढेलाई (परसाद) में एक नाबालिग लड़की का बाल विवाह होना था। इसे जिला प्रशासन, गायत्री सेवा संस्थान सलूंबर, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलाइंस, बाल अधिकारिता विभाग और स्थानीय पुलिस की सतर्कता और सक्रिय प्रयासों से समय रहते रोक दिया गया। यह विवाह 30 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन तय किया गया था। लेकिन इससे छह दिन पहले 24 अप्रैल को ही संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई कर बालिका को विवाह के बंधन में बंधने से बचा लिया।
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जानकारी के मुताबिक, गायत्री सेवा संस्थान की जिला समन्वयक पायल कनेरिया और फील्ड समन्वयक रमेश चौबीसा को जैसे ही विवाह की सूचना मिली, उन्होंने बिना समय गंवाए पटवारी सोनू खराड़ी और परसाद थाने के नानालाल गोपाल के साथ मिलकर परिवार से संपर्क साधा। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि विवाह के लिए तय की गई बालिका की उम्र करीब 17 वर्ष है, जो बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत अवैध है।
टीम ने बालिका के परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी दी और उन्हें बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया। समझाइश के बाद परिजनों ने लिखित आश्वासन दिया कि बालिका की उम्र 18 वर्ष पूर्ण होने से पहले विवाह नहीं किया जाएगा। साथ ही टीम ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर भविष्य में नियमों का उल्लंघन हुआ, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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इस पूरी कार्रवाई को बाल विवाह मुक्त सलूंबर अभियान के तहत अंजाम दिया गया, जो कि गायत्री सेवा संस्थान, जिला प्रशासन और बाल अधिकारिता विभाग की एक संयुक्त पहल है। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को जड़ से समाप्त करना और समाज में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना है।