उदयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के बहुमत हासिल करने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मेयर की कुर्सी को लेकर है। पार्टी ने अपने सभी 53 नवनिर्वाचित पार्षदों की बाड़ेबंदी कर रखी है और मेयर पद के लिए उनकी पसंद जानने की कवायद भी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पार्षदों से पर्ची पर मेयर पद के लिए तीन-तीन पसंदीदा नाम लिखवाए गए हैं। पार्टी में देर रात तक नाम पर मंथन होने की संभावना है और बुधवार को मेयर पद के लिए नामांकन कराया जाएगा। ताजा रिपोर्टों में भी दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर के नाम प्रमुख दावेदारों के तौर पर सामने आए हैं। 80 वार्ड वाले उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को 23 और अन्य के खाते में चार सीटें गई हैं। बहुमत मिलने के बाद भाजपा ने अपने सभी 53 पार्षदों को होटल में बाड़ेबंदी में रखा है। अब पार्टी के भीतर मेयर के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पार्षदों से पर्ची पर लिखवाए तीन-तीन नाम
बाड़ेबंदी के दौरान पार्टी नेताओं ने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों से मेयर पद को लेकर उनकी पसंद जानने की कोशिश की। प्रत्येक पार्षद को एक पर्ची दी गई, जिस पर तीन-तीन नाम लिखने को कहा गया। इसके जरिए पार्टी पार्षदों की पसंद और संभावित सर्वसम्मति का आकलन करना चाहती है। पार्टी नेताओं ने पार्षदों से कहा कि भाजपा के सभी 53 पार्षद मेयर बनने की क्षमता रखते हैं और किसी को खुद को कम नहीं समझना चाहिए। हालांकि औपचारिक तौर पर इनमें से एक पार्षद को मेयर बनाया जाना है। मेयर बनने वाले पार्षद से सभी को साथ लेकर चलने और पार्टी के प्रत्येक पार्षद को समान महत्व देने की अपेक्षा जताई गई है।
दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर के नाम पर ज्यादा चर्चा
भाजपा में मेयर पद की दौड़ में फिलहाल दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हैं। दोनों ही इस चुनाव में अपने-अपने वार्ड से जीतकर निगम पहुंचे हैं। यदि दोनों में से किसी एक नाम पर सर्वसम्मति बनती है तो उसे मेयर बनाया जा सकता है। वहीं, दोनों के बीच सहमति बनाने की जरूरत पड़ने पर एक को मेयर और दूसरे को डिप्टी मेयर बनाने का फॉर्मूला भी अपनाया जा सकता है। यानी दिनेश भट्ट मेयर बनते हैं तो प्रमोद सामर को डिप्टी मेयर और प्रमोद सामर को मेयर बनाए जाने की स्थिति में दिनेश भट्ट को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी देने पर भी विचार हो सकता है।
पारस सिंघवी का नाम भी चर्चा में
मेयर पद की दौड़ में पूर्व डिप्टी मेयर पारस सिंघवी का नाम भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, सिंघवी ने होटल में भाजपा पार्षदों से मुलाकात कर उनसे बातचीत की। इसके अलावा अतुल चंडालिया और महेंद्र सिंह शेखावत के नाम डिप्टी मेयर पद के लिए चर्चा में हैं। मेयर पद के नाम पर अंतिम फैसला होने के बाद ही डिप्टी मेयर के नाम पर मुहर लगने की संभावना है। अतुल चंडालिया पहले भी पार्षद रह चुके हैं। वहीं महेंद्र सिंह शेखावत पहले डिप्टी मेयर रह चुके हैं और उन्हें वसुंधरा राजे गुट का नेता माना जाता है।
दिनेश भट्ट के समर्थन में लॉबिंग की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, शहर विधायक ताराचंद जैन और कटारिया गुट की ओर से दिनेश भट्ट के नाम को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर प्रमोद सामर के लिए भी पार्टी के भीतर समर्थन जुटाने की कवायद जारी है।
बैठक में शहर विधायक, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, शहर जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठौड़, संभाग प्रभारी नाहर जोधा और जिला प्रभारी हरीश पाटीदार सहित पार्टी के प्रमुख नेता मौजूद रहे। बैठक में नवनिर्वाचित पार्षदों से चर्चा कर आगे की रणनीति पर मंथन किया गया।
पंकज बोराणा का नाम भी सामने आया
मेयर पद की दौड़ में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के रिश्तेदार पंकज बोराणा का नाम भी सामने आया है। बोराणा पहली बार पार्षद निर्वाचित हुए हैं। वे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं और शहर जिला भाजपा कार्यकारिणी में महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। हालांकि मेयर पद के लिए अनुभवी नेताओं के मुकाबले उनका राजनीतिक अनुभव कम माना जा रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर उनका नाम भी चर्चा में है।
कांग्रेस में अरुण टांक और पूनम कुंवर के नाम
भाजपा के साथ कांग्रेस में भी मेयर पद के उम्मीदवार को लेकर मंथन जारी है। कांग्रेस की ओर से अरुण टांक या डॉ. पूनम कुंवर राठौड़ में से किसी एक को मैदान में उतारे जाने की चर्चा है। अरुण टांक इससे पहले भी महापौर पद के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रह चुके हैं। वहीं डॉ. पूनम कुंवर राठौड़ कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ की पत्नी हैं। चुनाव परिणामों में अरुण टांक वार्ड 3 और पूनम कुंवर वार्ड 17 से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुई हैं। कांग्रेस भी बुधवार को मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकती है। नाम तय होने के बाद प्रत्याशी प्रस्तावक और समर्थक के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचेगा।
बुधवार को नामांकन, गुरुवार को जमा होगा सिंबल
भाजपा में मेयर पद के नाम पर अंतिम फैसला होने की संभावना है। इसके बाद बुधवार को मेयर पद के प्रत्याशी का नामांकन करवाया जाएगा। पार्टी का चुनाव चिन्ह यानी सिंबल गुरुवार को जमा कराया जाएगा। अब सबकी नजरें भाजपा के फैसले पर हैं कि उदयपुर के नए मेयर के लिए दिनेश भट्ट, प्रमोद सामर, पारस सिंघवी या किसी नए चेहरे को आगे किया जाता है।
तीन दशक से भाजपा के पास निगम की सत्ता
उदयपुर नगर निगम में भाजपा पिछले तीन दशक से सत्ता में है। अब तक भाजपा के छह बोर्ड बन चुके हैं। इन बोर्डों में प्रथम बोर्ड में किरण माहेश्वरी 1994 में मेयर बनीं। इसके बाद 1999 में दूसरे बोर्ड में युधिष्ठिर कुमावत, 2004 में तीसरे बोर्ड में रवींद्र श्रीमाली, 2009 में चौथे बोर्ड में रजनी डांगी, 2014 में पांचवें बोर्ड में चंद्रसिंह कोठारी और 2019 में छठे बोर्ड में जी.एस. टांक मेयर रहे।
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बोर्ड |
मेयर |
वर्ष |
|---|---|---|
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प्रथम बोर्ड |
किरण माहेश्वरी |
1994 |
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दूसरा बोर्ड |
युधिष्ठिर कुमावत |
1999 |
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तीसरा बोर्ड |
रवींद्र श्रीमाली |
2004 |
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चौथा बोर्ड |
रजनी डांगी |
2009 |
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पांचवां बोर्ड |
चंद्रसिंह कोठारी |
2014 |
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छठा बोर्ड |
जी.एस. टांक |
2019 |
2026 के चुनाव में भाजपा ने 80 में से 53 वार्ड जीतकर नगर निगम में लगातार सातवीं बार बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल की है। अब मेयर पद के लिए होने वाले नामांकन और उसके बाद चुनाव से यह तय होगा कि इस बार निगम की कमान किस पार्षद के हाथ में जाती है।