उदयपुर रेलवे ब्रिज ब्लास्ट मामला।
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उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट करने के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को कोर्ट ने पांच दिन के लिए रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी की जमीन पर रेलवे ट्रैक बना है, लेकिन 45 साल से उसे मुआवजा नहीं मिला। इसी वजह से उसने बहरे हो चुके सिस्टम तक अपनी बात पहुंचाने के लिए यह धमाका किया था। अब पांच दिन तक पुलिस और एटीएस मिलकर उनसे पूछताछ करेगी।
पुलिस ने इस मामले में गुरुवार को धूलचंद समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया था। इन लोगों ने विस्फोटक लगाया और बाइक पर निकल गए थे। दरअसल, जिस जमीन पर यह ट्रैक बना है, वह धूलचंद की है। वह कई साल से रेलवे प्रशासन और हिंदुस्तान जिंक से मुआवजा मांग रहा था, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इस वजह से वह नाराज था और इसी कारण उसने बदला लेने के लिए यह ब्लास्ट किया। एटीएस ने इस मामले का खुलासा गुरुवार को किया था।
स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के एडीजी अशोक राठौड़ ने बताया था कि 1974-75 और 1980 में धूलचंद मीणा की जमीन रेलवे और हिंदुस्तान जिंक ने अधिग्रहित की थी। उसे न तो मुआवजा दिया गया और न ही रोजगार। वह कई साल से इसकी कोशिश कर रहा था। कहीं से कोई मदद नहीं मिलने से उसने गुस्से में इस घटना को अंजाम दिया। उन लोगों ने अंकुश सुवालका से यह विस्फोटक खरीदा था। उसे भी हिरासत में लिया गया है।
मुख्य आरोपी को पकड़ने वाले होंगे सम्मानित
धूल सिंह को पकड़ने में मुख्य भूमिका निभाने वाले कॉन्स्टेबल पुष्पेंद्र को गैलेंट्री प्रमोशन दिया जाएगा। साथ ही टीम के अन्य अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को डीजीपी डिस्क व पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने बताया कि जांच में कांस्टेबल पुष्पेंद्र ने जांच अधिकारी को सूचना दी कि इस घटना में एकलिंगपुरा के धूलचंद का हाथ हो सकता है। धूलचंद को हिरासत में लेकर स्थानीय भाषा में कांस्टेबल मांगीलाल की मदद से पूछताछ की गई। इसमें धूलचंद ने ब्लास्ट की जिम्मेदारी ले ली।