अदालत ने दो करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में विशेष अभियान समूह के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी और दलाल सज्जन सिंह की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। न्यायालय ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया।
कार में मुलाकात और साक्ष्यों से पुष्टि
विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीक ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए बताया कि शिकायतकर्ता की आरोपी अधिकारी और दलाल से मुलाकात पुलिस अधिकारी की कार में ही हुई थी। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और कॉल विवरण से हुई है। लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि आरोपी एक पुलिस अधिकारी है, इसलिए जमानत मिलने पर वह मुख्य साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर जांच को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी ओर आरोपी पक्ष के अधिवक्ता अशोक टांक ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। अधिवक्ता के अनुसार शिकायतकर्ता ने 272 प्लॉट घोटाला मामले में खुद को बचाने के लिए यह शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दावा किया कि आरोपी अधिकारी की दलाल सज्जन सिंह से कोई जान-पहचान नहीं है।
मोबाइल पर लिखकर मांगी रिश्वत
बहस के दौरान शिकायतकर्ता निरंजन मोगरा ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी अधिकारी ने उनके घर से जब्त किए गए सोने के जेवर और जमीन के दस्तावेज जानबूझकर जब्ती सूची में शामिल नहीं किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब्त आभूषण और कागजात लौटाने तथा मामले में राहत देने के बदले दलाल सज्जन सिंह के मार्फत दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
निरंजन मोगरा ने अदालत को बताया कि आरोपी अधिकारी खुद रिश्वत की डील करने रानी रोड आया था। कानून की बारीकियों से वाकिफ होने के कारण उसने मुंह से एक भी शब्द नहीं बोला, बल्कि अपने मोबाइल पर दो करोड़ रुपये लिखकर रिश्वत की मांग की थी।