मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है और क्राउड फंडिंग के जरिये वो इस समस्या से निकलना चाहती है। तीनों ही राज्यों में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसी बात को ध्यान में रखते हुए उसने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं।
इसी संबंध में पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के अपने मुख्यालय में एक बैठक का आयोजन किया था। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 40 दिन के एक अभियान के तहत कांग्रेस क्राउड फंडिंग के जरिए पैसे जुटाने का काम करेगी।
जानकारी के अनुसार चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के चंदे में लगातार गिरावट आ रही है। 2016-2017 में जहां भारतीय जनता पार्टी को सर्वाधिक चंदा मिला वहीं कांग्रेस दूसरे पायदान पर रही। लेकिन भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच चंदे में भारी अंतर देखा गया भाजपा को जहां 532 करोड़ रुपये मिले वहीं कांग्रेस के खाते में 43 करोड़ की राशि जमा हुई।
कांग्रेस के लिए भाजपा आर्थिक रूप से भी काफी चुनौती पेश कर रही है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव के मैदान में जितने भी राजनीतिक दल हैं उन सभी ने 2016-2017 में जो चंदा एकत्र किया है उन सभी को जोड़ दिया जाए तो भी भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले कम नजर आता है। ऐसे में कांग्रेस के लिए जहां एक ओर जनता के वोट की चुनौती है तो वहीं दूसरी ओर उसे अपने आर्थिक हालात से भी काफी परेशानी का सामना करना होगा।