ग्वालियर से दिल्ली तक आयोजित 375 किमी लंबी महिला सशक्तिकरण दौड़ का समापन हो चुका है। भाजपा महिला मोर्चा ने नारी शक्ति को बढ़ावा देने और मोदी सरकार की महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के प्रचार के लिए मध्यप्रदेश से इसको शुरू किया था। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस मैराथन की अगवानी की।
भाजपा या वसुंधरा राजे भले ही महिलाओं के उत्थान की बात कर रही हों, लेकिन राजस्थान विधानसभा के वर्तमान हालात कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। पिछले चुनाव में राजस्थान के कुल 33 में से 14 जिलों से एक भी महिला विधानसभा नहीं पहुंच पाई थी।
वसुंधरा राजे सरकार में कुल 17 कैबिनेट मंत्री हैं, जिनमें सिर्फ एक महिला किरण माहेश्वरी को जगह मिली हुई है। वहीं अगर बात करें राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की तो इसमें अनिता भदेल और कृष्णेन्द्र कौर को जगह मिली है। एक और महिला विधायक कमसा छह राज्य मंत्रियों में से एक हैं। मतलब वसुंधरा कैबिनेट में सिर्फ चार महिला मंत्री हैं।
राजस्थान में विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या 200 है। अगर बात 2013 के विधानसभा चुनावों की करें तो मात्र 28 महिला प्रत्याशियों को जीत हासिल हो पाई थी। मौजूदा समय में 26 महिला विधायक हैं। गणना करें तो महज 13 प्रतिशत सीटों पर महिला विधायक हैं।
राजस्थान के 33 जिलों के 19 विधानसभा क्षेत्रों से महिलाएं चुनकर आई हैं। इन जिलों में अजमेर, अलवर, दौसा, श्रीगंगानगर, धौलपुर, भरतपुर व जोधपुर से दो-दो महिला विधायक हैं, जबकि राजसमंद, पाली, सवाई माधोपुर, कोटा, नागौर, करौली, जालौर, झालावाड़, जयपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, व बीकानेर जिले से एक-एक महिला विधायक है। इनमें भी सबसे ऊपर श्रीगंगानगर है, जहां की छह सीटों में से तीन पर महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।
महिला सशक्तिकरण दौड़ को तो भाजपा सफल मान रही है, पर देखना ये होगा कि वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर भाजपा कितनी महिलाओं को टिकट देती है।