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धार्मिक स्थल पर विवाद: 45 साल से बंद देवनारायण मंदिर का युवक ने तोड़ा ताला, दो समुदाय में तनाव, पुलिस मुस्तैद 

Wed, 16 Mar 2022 03:38 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा

सार

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में तनाव के हालात हैं। एक धार्मिक स्थल को लेकर दो समुदाय आमने-सामने हैं और एक-दूसरे पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर ज्ञापन दे रहे हैं। दो समुदाय के बीच विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि एक युवक ने 45 साल से बंद मंदिर का ताला तोड़ दिया। हालांकि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब जानिए क्या है पूरा मामला...
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लोगों की भीड़ के साथ सामने आया ताला तोड़ने वाला युवक। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान के भीलवाड़ा के मांडल में 45 साल से बंद देवनारायण मंदिर का ताला तोड़े जाने से तनाव का माहौल है। दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए हैं। दोनों ओर से विरोध-प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद है। ताला तोड़ने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पांच-छह दिन में इस तरह के हालात क्यों बने आइए जानते हैं...

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सबसे पहले समझिए विवाद क्या है
भीलवाड़ा के मांडल में एक भूखंड पर बने धार्मिक स्थल को लेकर 1977 से विवाद चल रहा है। जानकारों का कहना है इस भूखंड में एक छोटा सा ढांचा है, जिसे दो समुदाय के लोग अपना-अपना धार्मिक स्थल होने का दावा कर रहे हैं। इस कारण यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने इस धार्मिक स्थल पर ताला लगवा दिया था और चाबी मांडल थाने में जमा कर दी गई थी। इसके बाद से मंदिर का ताल बंद था, लेकिन करीब पांच दिन पहले धार्मिक स्थल का ताला तोड़ दिया गया। इसके बाद से मांडल में हालात तनाव पूर्ण बताए जा रहे हैं।  
 

किसने तोड़ा मंदिर का ताला 

युवक ने ताला ताेड़ने पहले दी थी चेतावनी। - फोटो : अमर उजाला
गोपाल बस्सी नामक युवक ने बीते शुक्रवार को 45 साल से बंद देवनारायण मंदिर के गेट का ताला तोड़ दिया। गेट खालते और झंडा लगाते हुए उसने इसका वीडियो भी बनाया है। वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में और पुलिस बल तैनात किया गया। वायरल हो रहे वीडियो में युवक ने कहा कि देवनारायण भगवान का 45 साल से बंद मंदिर खोल दिया है। हमारे लिए यह गर्व की बात है। मेरा जन्म भी नहीं हुआ था, उससे पहले से मंदिर बंद था। मंदिर खोले जाने की समस्त गुर्जर और हिंदू समाज के लोगों को बधाई।

राजस्थान में लोग खुशियां मनाएं और पकवान खाएं। खुद को सौभाग्यशाली समझ रहा हूं कि मंदिर खोलकर पहला झंडा चढ़ा रहा हूं। जय श्रीदेव, जय गुर्जुर, जय हिंदू। बता दें कि इससे पहले युवक ने एक भजन संध्या के दौरान धार्मिक स्थ्ल का ताला खोलने की चेतावनी भी दी थी। उसने कहा था कि सरकार कान खोलकर सुन ले, मैं गोपाल बस्सी हूं। मांडल में अकेला आऊंगा और देवनारायण भगवान के मंदिर को खोलूंगा। हिम्मत है तो रोककर और गिरफ्तार करके बता देना।

अगले दिन आमने-सामने आ गए दो समुदाय 

धार्मिक स्थल खोलने के अगले दिन दो समुदाय आमने-सामने आ गए। ताला तोड़ने वाले युवक का विरोध होने लगा। दोनों समुदाय के संगठनों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। एक समुदाय ने बीते शुक्रवार को घटना के विरोध में प्रदर्शन किया और मांडल एसडीएम को ज्ञापन देकर विवादित धार्मिक स्थल का ताला तोड़कर वीडियो बनाने वाले युवक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। इसके विरोध में अगले दिन दूसरे समुदाय के लोगों ने बनेड़ा कस्बे को बंद रखकर विरोध जताया। उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन देकर दूसरे सामाजिक संगठनों के खिलाफ नारेबाजी करने पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ताला तोड़ने वाले युवक की तलाश में जुटी हुई थी। 

जन समूह के साथ सामने आया ताला तोड़ने वाला युवक 

धार्मिक संगठनों ने निकाली रैली। - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को विवादित धार्मिक स्थल का ताला तोड़ने वाला युवक करीब ढाई हजार लोगों के जनसमूह के साथ भीलवाड़ा पहुंचा। इस दौरान पुलिस के जवान तैनात रहे और जनसमूह के साथ चले। कई हिंदू संगठनों ने ताला तोड़ने वाले गोपाल सिंह का स्वागत किया। युवक खुली जीप में सवार था और उसके पीछे-पीछे हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता चल रहे थे। रैली के रूप में चल रहे जनसूमह के जेल चौराहे पहुंचे ही पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। लेकिन कार्यकर्ता जिला मुख्यालय की ओर रवाना हो गए। इसके बाद विवाद को लेकर कलेक्टर आशीष मोदी को ज्ञापन दिया गया। पुलिस ने ताला तोड़ने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया है। 
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दावा: 1955 में शुरू हुआ था निर्माण 

एक समुदाय के लोगों ने बताया कि भगवान देव नारायण जी का ग्राम मांडल में प्राचीन मंदिर है। इसका निर्माण गुर्जर समाज के पंचों ने खेताजी-नेताजी ने सन् 1555 में निर्माण शुरू कराया था, 1557 तक यह मंदिर बनकर तैयार हुआ। 1561 में बड़वा जी की पौथी के रिकॉर्ड में यह दर्ज है। देवनारायण जी के परदादा मांडूराव जी ने 1237 वर्ष पहले मांडल गांव को बसाया था। देवनारायण भगवान का इतिहास तभी से है। समुदाय विशेष का इनसे कोई लेना-देना नहीं है। लोगों ने कहा कि देवनारायण मंदिर पर समुदाय विशेष के लोगों का दावा करने पर 1977 से कोर्ट रिसीवर नियुक्त कर रही है। 

गुर्जर समाज के लोगों का कहना है कि दूसरे समुदाय ने इसे तलिया मीठू शाह फकीर का धार्मिक स्थल होने का दावा किया है। सिविल कोर्ट ने उनके इस दावे को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद भी देवनारायण मंदिर को उन्हें नहीं दिया गया। इस निर्णय के खिलाफ की गई अपील भी खारिज हो चुकी है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक स्थल का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।   
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