राजस्थान के कोटा के दीगोद क्षेत्र में एक तहसीलदार के लिए बेटियों से पैतृक संपत्ति छोड़ने की अपील करना भारी पड़ गया। इसके चलते उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। दरअसल तहसीलदार दिलीप प्रजापति ने राखी पर अपनी बहनों से स्वैच्छिक पैतृक संपत्ति का हक त्यागने की अपील करने को लेकर एक पत्र जारी किया था।
इसमें उन्होंने अपील की थी कि रक्षाबंधन पर बहनें पिता की संपत्ति में से भाई के लिए सुरक्षित हक त्याग करने का कदम उठाएं। इसी को लेकर प्रजापति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राजस्व मंडल राजस्थान अजमेर की ओर से निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। निलंबन के बाद तहसीलदार दिलीप प्रजापति ने कहा है कि सरकार का आदेश सिर माथे पर है।
मैंने दीगोद में तहसीलदार रहते हुए अवैध खनन करने वालों के खिलाफ शिकंजा कसकर एसीबी में मामला दर्ज करवाया था। प्रतीत होता है कि उसकी सजा षड्यंत्र रच मेरे खिलाफ माहौल बना कर दी गई है।
दिलीप प्रजापति का कहना है कि अभी मेरे सेवानिवृत्ति में अभी 11 महीने बाकी हैं। अपने कार्यकाल के दौरान मैंने कई अभूतपूर्व कार्य किए हैं, इसका आम जनता को लाभ मिला है। इससे पहले भी मैंने 16 जुलाई को बेटियों से हक त्यागने का लेटर जारी किया था, लेकिन उन पर कोई दबाव नहीं डाला गया।