लॉकडाउन के चलते राजस्थान में फंसे बिहार के छात्र वापस अपने घर लौट आए हैं। लेकिन अभी भी बहुत सारे प्रवासी मजदूर वहां फंसे हुए हैं। मुख्यमंती अशोक गहलोत ने मजदूरों को आश्वासन दिया है। बिहार लौटे सभी छात्रों को उनके घरों पर क्वारंटीन किया गया है। मोहल्ले वाले छात्रों से दूरी बनाए हुए हैं। बिहार वापस लौटे छात्रों ने बताया कि किस तरह उन्होंने परेशानियों का सामना किया।
मंगलवार को कोटा से दानापुर पहुंची ट्रेन से आने वाले एक छात्र ने कहा कि कोटा में खाने की समस्या बढ़ती जा रही थी। हरी सब्जी नहीं मिल रही थी इसीलिए सिर्फ आलू की सब्जी खानी पड़ रही थी। अब दोबारा कोटा नहीं जाएंगे, यहीं पढ़ेंगे। वहीं एक अन्य छात्रा ने कहा कि जैसे-जैसे लॉकडाउन बढ़ता गया, समस्या बढ़ती गई। मेस में खाने की क्वालिटी खराब थी और पैसा भी मनमाने लेने लगे थे। हम पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे।
ज्यादातर छात्रों का कहना था कि मेस ने मनमाने पैसे लेकर भी अच्छा खाना नहीं दिया। एक छात्र ने कहा कि लॉकडाउन के कारण बाहर निकलना नहीं हो पा रहा था। सभी दोस्त चले गए थे, इसलिए परेशानी हो रही थी।
अशोक गहलोत ने प्रवासी मजदूरों को दिया आश्वासन
वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि कोई भी श्रमिक अपने गृह स्थान के लिए पैदल रवाना न हो। राज्य सरकार उन्हें बसों और ट्रेनों के माध्यम से भेजने के लिए उचित व्यवस्था कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो श्रमिक पैदल रवाना हो गए हैं, उनके लिए रास्ते में कैंप और भोजन सहित अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। संकट की इस घड़ी में हर व्यक्ति के जीवन की रक्षा करना और उनके दुख-दर्द को बांटना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गहलोत ने शनिवार को प्रवासियों के आवागमन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा कि जिन प्रवासी और श्रमिकों ने आवागमन के लिए पंजीयन करवाया है उन्हें ई-पास प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी न आए इसके लिए ई-पास के सिस्टम को और बेहतर बनाएं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि श्रमिकों और प्रवासियों को जल्द से जल्द उनके गृह स्थानों पर सुरक्षित पहुंचाया जा सके इसके लिए रेलवे से समन्वय कर ट्रेनों की संख्या बढ़वाई जाए। जिन स्थानों की दूरी कम है, वहां बसों से लोगों को उनके गृह स्थान भिजवाया जाए।