कोटा में छात्रों की आत्महत्यों के बढ़ते मामले बता रहे हैं कि सरकारी उपाय खास काम नहीं आ रहे हैं। इसी महीने कोटा में दो छात्रों ने अत्महत्याएं की हैं। कोटा में पिछले वर्ष छात्रों द्वारा आत्महत्याओं को 30 मामले और इससे पहले वर्ष 45 मामले सामने आए थे। करीब चार महीने पहले राजस्थान सरकार ने कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिए थे कि उनके यहां प्रवेश लेने आए आए बच्चों की पहले परीक्षा लेकर अभिभावकों को उसके चयन की सम्भावना को बता दें।
वे अपने स्तर पर परीक्षा लेकर संबंधित बच्चे के माता-पिता को बताएंगे कि बच्चे का संबंधित परीक्षा में चयन का प्रतिशत क्या होगा, जिससे अभिभावक अपने बच्चे के बारे में इस हिसाब से निर्णय कर सकें। इससे कमजोर छात्र पढ़ाई का और अभिभावकों द्वारा मिलने वाले दवाब से बच सकें। सूत्रों ने बताया कि लाभ कमाने के चलते अभी भी कई संस्थान सरकारी निर्देशों को नजर अंदाज कर रहे हैं।
कोचिंग संस्थान टेस्ट तो लेते हैं, लेकिन यह औपचारिक होता है और लगभग सभी को कोचिंग के लिए प्रवेश दे दिया जाता है। सरकार ने कोचिंग संस्थानों को यह भी निर्देश दिए है कि बच्चों को सोने और आराम काने का भी पूरा वक्त दिया जाए, ताकि उन्हें पढ़ाई के तनाव से राहत मिल सके। साथ ही, कोचिंग संचालकों से काउंसलर के बैठने का स्थान व समय भी निर्धारित करने को कहा गया। यह व्यवस्था भी इक्का दुक्का कोचिंग संस्थानों ने ही दी है।