आईटीबीपी डीजी एसएस देसवाल सहित केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब सौ अफसरों ने शनिवार को जैसलमेर से लगे भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के रेगिस्तान में जब चलना शुरू किया तो पाकिस्तानी रेंजर्स देखते रह गए। वे हैरान थे कि भारत के इतने अफसर, वो भी एक साथ बॉर्डर के इलाके में क्यों आए हैं। बीएसएफ, सीआरपीएफ, एनडीआरएफ, आरएएफ, असम राइफल्स, एनएसजी और राजस्थान पुलिस के अफसर तेज कदमों से आगे बढ़ रहे थे।
इस मार्ग का अधिकतर हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ है। यहां कई ऐतिहासिक लड़ाई हुई हैं। रास्ते में ही किशनगढ़ का मशहूर किला भी है। रूट का दूसरा हिस्सा इंदिरा गांधी नहर के साथ-साथ चलता है। आईटीबीपी का यह फिटनेस मार्च भारत सरकार के फिट इंडिया मूवमेंट के प्रति ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित हो रहा है। इस साल फिट इंडिया फ्रीडम रन में आईटीबीपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया था।
डीजी देसवाल, लगभग 2 वर्ष में इससे पहले दर्जनों ऐसे मार्च का नेतृत्व कर चुके हैं। इनमें हिमालय से लेकर रेगिस्तान और उत्तर पूर्व से समुद्र के किनारों पर आयोजित मार्च भी शामिल हैं। वे लिपुलेख, सांगला घाटी में 103 किलोमीटर, औली तपोवन, गंगोत्री तपोवन, भुज, कोणार्क पुरी, राजस्थान और पंजाब सीमा, जोधपुर बीकानेर में मिशन 100, और फूलों की घाटी में आयोजित मार्च में भाग ले चुके हैं।