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सोनिया ने माना, कांग्रेस के वोट बैंक में लगी सेंध

Sat, 19 Jan 2013 12:00 AM IST
जयपुर/संजय मिश्र
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कांग्रेस ने अपने खिसकते जनाधार की चिंता पर चिंतन करते हुए देश के सबसे प्रभावशाली मध्य वर्ग से अपनी दूरी पाटने का फैसला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के वोट बैंक में लगी सेंध पर अपनी चिंता का इजहार करते हुए कहा कि टेकसेवी युवाओं और शिक्षित मध्य वर्ग से अलग-थलग नहीं हुआ जा सकता।
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राजनीतिक दलों से लोगों की बढ़ी अपेक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरने के लिए कांग्रेस को तैयार रहने की इस खरी नसीहत के साथ सोनिया ने पार्टी की 2014 की चुनावी तैयारी के रोडमैप को साफ कर दिया। साथ ही पार्टीजनों को चेता भी दिया कि जागरूक जनता अब अपनी अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगी। सिमटते जनाधार की हकीकत को कबूल करते हुए कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया है कि वह फिलहाल गठबंधन की राजनीति का सफर जारी रखेगी।

कांग्रेस के शिखर नेताओं के इस चिंतन शिविर का शुक्रवार को आगाज करते हुए सोनिया ने कहा कि बेशक कांग्रेस आज भी सबसे बड़ी पार्टी है मगर इस सच से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि हमारे परंपरागत वोट बैंक वाले राज्यों में दूसरे दलों ने जगह बना ली है। सोनिया का स्पष्ट इशारा उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर था।
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पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी पर बेबाक राय जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि कई मौकों पर हम अनुशासित और संगठित टीम की तरह काम करने में नाकाम रहे, जिसकी वजह से हमने अवसर गंवा दिए। इसलिए जरूरी है कि अब निजी महत्वाकांक्षाओं और अहंकार को भूल कर पार्टी की जीत सुनिश्चित की जाए।

सोनिया ने गठबंधन की राजनीति को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जिन राज्यों में गठबंधन है, वहां हमें गठबंधन की भावना और पार्टी के सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाकर चलना है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारत बदल रहा है। युवाओं की आबादी बढ़ रही है। वे अपने अधिकारों के लिए ज्यादा मुखर हैं। सोशल मीडिया, मोबाइल फोन और इंटरनेट से अपनी आवाज बुलंद करने में ज्यादा सक्षम हैं। इनका इस्तेमाल वे जनप्रतिनिधियों से अपना हक मांगने में कर रहे हैं।

लोग भ्रष्टाचार से आजिज आ गए हैं और अब इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। इस हकीकत को हमें समझना चाहिए। इस बढ़ते शिक्षित मध्य वर्ग को भ्रमित होकर राजनीतिक प्रक्रिया से अलग-थलग नहीं होने दिया जा सकता।

इसी संदर्भ में सोनिया ने कांग्रेसजनों से शादियों-त्योहारों और खुशी के समारोहों पर शानो-शौकत दिखाने के लिए फिजूल खर्ची नहीं करने की नसीहत दी। उनका कहना था कि आखिर क्या लोगों के मन में यह सवाल नहीं उठता कि यह पैसा कहां से आता है?

सोनिया ने दिल्ली की बर्बर गैंगरेप की घटना का जिक्र किए बिना महिलाओं के साथ यौन अपराध और अत्याचार के खिलाफ आंखें खोलने की सख्त जरूरत बताई। उनका कहना था कि इस तरह की शर्मनाक घटनाओं को रोकने के लिए महिलाओं के मुद्दों को हमें अपनी राजनीतिक सोच का केंद्र बनाना होगा।

चिंतन शिविर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के अलावा यूपीए सरकार तथा पार्टी के चुनिंदा साढे़ तीन सौ के करीब प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सोनिया ने महंगाई और डीजल के दामों में ताजा बढ़ोतरी को लेकर कोई चर्चा नहीं की। हालांकि कांग्रेस की आंतरिक बैठक में रमेश चेन्नीथला समेत कई नेताओं के डीजल को लेकर फैसले पर सवाल उठाए।

चिंतिन शिविर तय करेगा रोडमैप
कांग्रेस की दो दिन की चिंतन बैठक में पांच समूहों में राजनीतिक, आर्थिक-सामाजिक, महिला सशक्तिकरण, विदेश नीति और संगठन पर अलग-अलग बहस होगी। इस चिंतन के निष्कर्षों पर रविवार (20 जनवरी) को एआईसीसी की बैठक में मुहर लगाई जाएगी। कांग्रेस के जयपुर चिंतन शिविर की घोषणा ही अगले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की दशा-दिशा होगी।

कांग्रेस का यह तीसरा चिंतन शिविर है और इसमें खास बात है कि पहली बार राहुल गांधी के युवा बिग्रेड को पार्टी के शीर्ष मंच पर बड़ी संख्या में विचार मंथन के लिए जगह दी गई है। कांग्रेस का इससे पहले 1998 में पचमढ़ी और 2003 में शिमला में चिंतन शिविर हुआ था। शिमला चिंतन शिविर के रोडमैप के सहारे ही कांग्रेस लंबे अर्से बाद केंद्र की सत्ता में लौटी थी और पिछले नौ सालों से वह इस पर काबिज है।

सिविल सोसाइटी के आंदोलनों से लेकर दिल्ली में गैंगरेप के खिलाफ गोलबंद हुए मध्य वर्ग के आक्रोश की लहर को कांग्रेस गंभीर सियासी चुनौती मान रही है। इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चिंतन शिविर में युवाओं के साथ जल, जमीन और जंगल से जुड़े आंदोलनों के मुद्दों पर पार्टी को आगे रहने के लिए सचेत किया है।

इस बार आक्रामक नहीं दिखा सोनिया का रुख
कांग्रेस के इस चिंतन शिविर में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का रुख पहले की तरह आक्रामक नहीं दिखा। राजनीतिक विश्लेषकों को दूसरी हैरान करने वाली बात यह दिखी कि सोनिया ने इस बार सांप्रदायिकता के मुद्दे से दूरी बनाए रखी। माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से अगले आम चुनावों की कमान नरेंद्र मोदी को सौंपने की चर्चाओं के चलते कांग्रेस को अपनी रणनीति में यह बदलाव करने पर मजबूर किया है। कांग्रेस मान रही है कि सांप्रदायिकता के मुद्दे को हवा देने से ध्रुवीकरण भाजपा की ओर होगा।

कुछ दावे
--यूपीए के पिछले नौ साल के शासन में देश का जबरदस्त आर्थिक-सामाजिक विकास हुआ।
--कांग्रेस आज भी सबसे बड़ी पार्टी है, पार्टी का हर राज्य, जिले और ब्लॉक में वजूद है।

कुछ चेतावनी
--लोग अब पहले से ज्यादा जागरूक हैं और सरकार से उनकी उम्मीदें बढ़ी हैं।
--लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं, हमें यह बात समझनी होगी।
--महिलाओं पर अत्याचार हमारे लिए शर्म की बात है।
--पार्टीजन शादियों पर शानो-शौकत दिखाने के लिए फिजूल खर्ची नहीं करें। इससे सवाल उठता है कि इतना पैसा कहां से आया।

पाक को संदेश
सोनिया गांधी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना और दो भारतीय जवानों के साथ बर्बरता की घटना का जिक्र किए बिना कहा कि सभ्य बर्ताव के माहौल में ही पड़ोसी देशों के साथ बातचीत हो सकती है।
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