सिरोही जिले के सरूपगंज काछोली में सर्दी-जुकाम से पीड़ित तीन साल की बालिका की इंजेक्शन लगाने के तबियत बिगड़ गई। इससे उसकी मौत हो गई। मृतक बालिका के शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।
उधर, इस मामले में पुलिस द्वारा आरोपी झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मामला सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमा भी एक्टिव मोड में आ गया है। सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी द्वारा सभी बीसीएमओ को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध तरीके से प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।
सरूपगंज थानाधिकारी कमल सिंह के अनुसार, इस मामले में सरूपगंज, काछोली निवासी नरपत सिंह ने रिपोर्ट देकर बताया कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली उसकी बेटी जाह्नवी (आठ) शुक्रवार शाम ट्यूशन से लौटी तो उसे सर्दी-जुकाम हो रहा था। इस पर वह उसे गांव में प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डॉ. मंसूरअली के पास लेकर गया था। जहां पर डॉ. मंसूरअली ने जाह्नवी के इंजेक्शन लगाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे वह जल्दी स्वस्थ हो जाएगी। इसके बाद उसने जाह्नवी को इंजेक्शन लगा दिया।
इंजेक्शन लगाते ही जाह्नवी की तबियत बिगड़ गई। जैसे ही वह खड़ी हुई, उसे उल्टी हो गई। देखते ही देखते जाह्नवी के होंठ काले हो गए। जाह्नवी की तबियत लगातार बिगड़ती गई और थोड़ी देर में मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमा हुआ एक्टिव
उधर, यह मामला सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमा एक्टिव हो गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खराड़ी ने मृतक बालिका के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में सभी ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को ऐसे सभी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही उन्हें हिदायतें दी गई हैं, यदि ऐसा नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
खुलेआम प्रैक्टिस कर रहे हैं झोलाछाप डॉक्टर
आबूरोड, सरूपगंज, पिंडवाड़ा और रेवदर सहित जिले भर में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम प्रैक्टिस कर लोगों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सबसे बड़ी एवं खास बात यह है कि जागरुक लोगों द्वारा जब भी उच्च प्रशासन को इस बारे में शिकायत की जाती है तो कार्रवाई होने से पहले ही इन लोगों को भनक लग जाती है। ऐसे में विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है तथा कई प्रकार के सवाल खड़े कर रही है।